एचपीयू फर्जी मार्कशीट मामले में बड़ा खुलासा
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में उजागर हुए फर्जी मार्क्सशीट मामले के आरोपी सहायक कुल सचिव (बीए फाइनल ईयर ब्रांच इंचार्ज) बीके शर्मा ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल लिया है।
आरोपी ने माना कि उसने ही बेटे को नंबर देकर पास करवाया था। बेटे ने परीक्षा नहीं दी थी। इन नंबरों की हिस्ट्री शीट और अन्य रिकॉर्ड में एंट्री करने के बाद उसने इसे कंप्यूटर शाखा में प्रिंट करने को भेजा था। यहां से फर्जी मार्क्सशीट प्रिंट होकर आ गई थी।
फिलहाल आरोपी ने यही माना है कि इस मार्क्सशीट को तैयार करने में उसके साथ कोई नहीं था। पुलिस अभी तक आरोपी के बयानों पर पूरी तरह विश्वास नहीं कर रही है।
अब पुलिस आरोपी के बेटे और परिणाम तैयार करने वाली शाखाओं में कार्यरत कर्मचारियों को भी जांच के घेरे में लाने की तैयारी में है। पुलिस ने बीए अंतिम वर्ष और इस मामले से संबंधित शाखाओं से रिकॉर्ड कब्जे में लिया है।
रिमांड पर अधिकारी, एचपीयू से निलंबित
बालूगंज पुलिस ने आरोपी बीके शर्मा को शनिवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से इसे सोमवार तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पुलिस इससे पूछताछ कर रही है।
आने वाले दिनों में पुलिस आरोपी और उसके बेटे से आमने-सामने भी पूछताछ कर सकती है। आरोपी अधिकारी को यूनिवर्सिटी ने निलंबित कर दिया है।
फर्जी मार्क्सशीट तैयार करने वाले अधिकारी ने बेटे को मर्जी से नंबर देकर प्रथम श्रेणी में बीए की डिग्री दिलवा दी थी। तीन साल में छात्र के एक हजार में से 601 अंक दे दिए गए।
इसमें फाइनल ईयर में इंग्लिश में 100 में से थियोरी में 56 अंक, म्यूजिक थियोरी में 29 और प्रैक्टिकल में 58 अंक के साथ कुल 87 अंक दिए गए। संस्कृत में 68 अंक दिए। फर्जी मार्क्सशीट में अंतिम वर्ष में उसे 211 अंक दिये गए थे।
डीएसपी बलबीर जसवाल ने कहा कि यदि छात्र के परीक्षा में अपीयर होने की बात जांच में सामने आती है, तो उत्तर पुस्तिकाओं को भी कब्जे में लेकर जांच की जाएगी।