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शर्मनाक! अस्पताल के शौचालय में डिलीवरी, मौत

Tue, 08 Jul 2014 12:39 PM IST
ब्यूराे/अमर उजाला, चंबा
ब्यूराे/अमर उजाला, चंबा Updated Tue, 08 Jul 2014 12:39 PM IST
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Embarrassing! delivery In the toilet hospital , neonatal died

चंबा जिला के सिविल अस्पताल तीसा में चिकित्सक और अस्पताल कर्मचारियों की लापरवाही से जन्म के बाद नवजात की मौत हो गई। यहां तक कि शौचालय में हुई डिलीवरी के बाद बच्चे को मृत बताकर वहीं पड़ा रहने दिया गया।

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रूई मांगने पर भी स्वास्थ्य कर्मचारी भड़क गई और प्रसूता महिला पर बरसते हुए कहा कि उसे बिना अनुमति शौचालय में नहीं जाना चाहिए था। महिला के पति चूहड़ू राम पुत्र लसमा निवासी बंजवाड़ ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
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उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी मालो देवी गर्भवती थीं। सोमवार को सुबह करीब उसे सिविल अस्पताल तीसा पहुंचाया गया। मगर डाक्टरों की लापरवाही से उनके नवजात बच्चे की मौत हो गई।
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मृत बताकर शौचालय में ही पड़ा रहने दिया नवजात

Embarrassing! delivery In the toilet hospital , neonatal died

करीब आधा घंटा इंतजार करने के बाद पहुंचा डॉक्टर दवाई लिखकर वहां से चला गया। इसके बाद गर्भवती महिला की देखभाल के लिए स्वास्थ्य कर्मचारी या अन्य स्टाफ वहां मौजूद नहीं था। इसके करीब दो घंटे बाद भी उसे दाखिल नहीं किया गया। वह अस्पताल में दर्द से तड़पती रहीं। उन्होंने बताया कि जब उनकी पत्नी शौचालय गईं तो उसने दर्द से कराहते हुए वहीं बच्चे को जन्म दे दिया।

चूहड़ू राम ने बताया कि इस पर वहां तैनात स्वास्थ्य कर्मी भड़क उठी और कहने लगी कि बिना अनुमति बाथरूम नहीं जाना चाहिए था। जब सफाई कर्मियों से रूई मांगी तो कहने लगे कि बच्चा मर गया है और उसे वहीं पड़ा रहने दिया गया।

कुछ देर बाद जब चिकित्सक वहां पहुंचा तो उसने बच्चे को ऑक्सीजन लगाई। इसके बाद बच्चे को 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसने बताया कि उसके बच्चे को समय पर इलाज मिल जाता तो वह बच सकता था।

डाक्टरों ने कहा छह माह में हुई डिलीवरी

Embarrassing! delivery In the toilet hospital , neonatal died

डा. रिशु पुरी ने कहा कि छह महीने में डिलीवरी होने के कारण नवजात ने दम तोड़ा है। जैसे ही वह अस्पताल पहुंचे तो बता दिया था कि बच्चे का बचना मुश्किल है। नवजात का वजन एक किलो से भी कम था। उसको बचाने के लिए मशीन में रखा गया। फिर इसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया था।

यह कहते हैं बीएमओ बीएमओ तीसा डा. कपिल ने बताया कि अस्पताल में गर्भवती की पूरी जांच हुई थी। इंजेक्शन भी लगाए गए थे। छह माह में ही ब्लीडिंग होने के कारण महिला के परिजनों को बता दिया गया था कि बच्चे का बचना मुश्किल है।

इस बीच जब गर्भवती बाथरूम गई तो उसका गर्भपात हो गया। बच्चे को बचाने की पूरी कोशिश की गई। फिर जिला अस्पताल रेफर किया गया। इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है।

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