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हिमाचल में बनी दवाओं के सैंपल फेल, कंपनी पर केस
ब्यूरो/अमर उजाला, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 02 Jun 2016 02:18 PM IST
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ड्रग इंस्पेक्टर ने एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया है।
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हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित ओएस्टर फार्मा प्राइवेट लिमिटेड की दो दवाएं लैब जांच में मानकों की कसौटी पर फेल हो गई हैं। ड्रग कंट्रोलर के आदेश पर ड्रग इंस्पेक्टर ने कंपनी जाकर वहां के केमिस्ट की मौजूदगी में पुन: जांच कराई, तो वहां भी मात्रा के मुताबिक साल्ट नहीं मिला। इसके बाद उच्चाधिकारियों के आदेश पर ड्रग इंस्पेक्टर संदेश मौर्या ने कंपनी के एमडी रामलाल गर्ग, कंपनी के केमिस्ट सुखवीर सिंह और संजय कुमार सिन्हा के खिलाफ एसीजेएम कोर्ट प्रथम में मुकदमा दायर किया है।
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लखीमपुर में निघासन रोड स्थित प्रकाश मेडिकल एजेंसी पर ड्रग इंस्पेक्टर संदेश मौर्या 28 मई 2015 को छापा मारा था, जहां से ओएस्टर फार्मा की चार दवाओं रेजीपार, एसटीफ्लेम पी, एसटीसेफ एसबी और एसटीपी टैबलेट के नमूने लिए थे। इन नमूनों को जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला लखनऊ भेजा गया था, जहां से 20 जून 2015 को जांच रिपोर्ट ड्रग इंस्पेक्टर को प्राप्त हुई।
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लैब जांच में दो दवाएं रेजीपार और एसटीसेफ एसबी पास हो गई, जबकि दो दवाएं एसटीफ्लेम पी और एसटीपी टैबलेट फेल हो गईं। एसटीफ्लेम पी मिसब्रांड पाई गई, तो एसटीपी में पैरासिटामाल साल्ट की मात्रा 71.76 फीसदी पाई गई। ड्रग इंस्पेक्टर के मुताबिक 100 फीसदी साल्ट के सापेक्ष करीब 28 फीसदी पैरासिटामाल साल्ट कम होने से मरीजों पर दवा पूर्ण रूप से असर नहीं करती है।
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जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले की सूचना ड्रग कंट्रोलर लखनऊ को दी गई। मामले की विवेचना कर रहे ड्रग इंस्पेक्टर ने प्रकाश मेडिकल एजेंसी से मिले बिलों के आधार पर कंपनी मालिक को नोटिस भेजा। इसके बाद आयुक्त के निर्देश पर ड्रग इंस्पेक्टर जांच के लिए 12 अप्रैल 2016 को ओएस्टर फार्मा सोलन हिमाचल प्रदेश पहुंचे, जहां सोलन के डीआई बसंत मित्तल की मौजूदगी में पुन: दवाओं के सैंपल की जांच कराई गई तो यहां भी नमूना फेल निकला।
इस जांच के दौरान फार्मा कंपनी के एमडी रामलाल गर्ग, केमिस्ट सुखवीर सिंह और संजय कुमार सिन्हा मौजूद रहे, जिन्हें दोषी मानते हुए डीआई ने रिपोर्ट ड्रग कंट्रोलर (डीसी) को सौंपी। इसके बाद डीआई ने 28 मई 2016 को एसीजेएम कोर्ट प्रथम में कंपनी के एमडी और दो केमिस्टों के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया है।
वर्जन
फार्मा कंपनी के केमिस्ट और दवा को जांच कर पास करने वाले दूसरे केमिस्ट की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। वहीं फार्मा कंपनी के एमडी को भी सह अभियुक्त बनाया गया है। इस मामले में दोषियों के खिलाफ 10 लाख जुर्माना या 10 साल कैद की सजा का प्रावधान है। -संदेश मौर्या, ड्रग इंस्पेक्टर