वन भूमि कब्जाने पर 11 लोगों पर क्रिमिनल केस
- पुलिस महानिदेशक ने हाईकोर्ट में पेश की ताजा स्टेटस रिपोर्ट
- सीजे बोले, आदेश न माने तो चलेगा अवमानना का मामला
- कोटखाई में 19 लोगों ने वन भूमि पर बना रखे हैं अवैध मकान
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सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर पुलिस महानिदेशक और मुख्य अरण्यपाल वन ने मंगलवार को हिमाचल हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट सौंपी है। पुलिस महानिदेशक ने दायर हलफनामे में बताया गया है कि जुलाई 2015 से अभी तक कुल्लू में चार, सिरमौर में चार, शिमला में दो और कांगड़ा में एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों को निर्देश दिए कि वह 30 मार्च तक अपनी ताजा स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में दायर करें। प्रदेश हाईकोर्ट ने वन भूमि से कब्जे छुड़ाने के लिए समय-समय पर पारित आदेशों की अक्षरश: अनुपालना के आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि यदि आदेश न माने तो उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मामला चलाया जा सकता है। मामले की आगामी सुनवाई 30 मार्च को होगी।
61 लोगों का 337 बीघा भूमि पर कब्जा
मुख्य अरण्यपाल वन ने कोर्ट को कोटखाई के चैंथला में हुए अवैध कब्जों की जानकारी ताजा स्टेटस रिपोर्ट से दी। इस रिपोर्ट के अनुसार असंरक्षित भूमि पर 61 लोगों ने 337 बीघा भूमि पर कब्जा किया हुआ है जबकि पांच मामलों में 1-26-28 हेक्टेयर संरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जे पाए गए हैं।
13 जुलाई को जगदीश नामक व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 10 बीघा से कम भूमि पर कब्जा करने वालों पर भी मामले दर्ज किए जाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार चैंथला निवासी प्रताप, राजकुमार, बलवीर, लीला ताजटा, लायकराम, प्रदीप, प्रमोद, जगदीश, प्रकाश, रामलाल, हिरदू देवी, सुरेंद्र, राजेंद्र, राजेश, सत्या देवी, परसराम, राजेश राजपाल, हिसी देवी व संजय ने वन भूमि पर मकान बनाए हैं।
चार मामलों में बिजली-पानी कनेक्शन काट दिए गए हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में वन भूमि पर अवैध कब्जे के हजारों मामले हैं। हाईकोर्ट ने बड़े कब्जों को छह माह और छोटे कब्जों को एक साल के भीतर छुड़ाने के आदेश दिए हैं।