मंदिर में प्रवेश करने से रोकने पर बाबा केवल पुरी सहित दो को कारावास
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंदिर में प्रवेश करने से रोकने पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निरोधक अधिनियम की धारा 3 के तहत एक मामले में दोषी करार दिए गए बाबा केवल पुरी और उनके एक अन्य सहयोगी को कोर्ट ने एक साल की सजा सुनाई है। इसके अलावा कोर्ट ने दस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की सूरत में एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
विशेष न्यायाधीश बहादुर सिंह की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। गौरतलब है कि कोर्ट ने दोनों को तीन अक्तूबर को दोषी करार दे दिया था। इसके बाद दोनों की सजा का दिन मुकर्रर किया गया था जिसके बाद कोर्ट ने दोनों को एक साल की सजा व दस हजार रुपये जुर्माना देने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर एक माह के अतिरिक्त कारावास की सजा दोनों को भुगतनी होगी।
क्या है मामला
27 जनवरी 2012 को कोट थाना बिलासपुर में तुलसी दास बंसल ने एफआईआर दर्ज करवाई थी जिसमें उसने कहा था कि 24 जनवरी, 2012 को जब वह अपने कुछ अन्य साथियों के साथ महाबलि मंदिर खैरियां में प्रवेश कर रहा था तो बाबा केवल पुरी और एक अन्य व्यक्ति हर केवल सिंह ने उन्हें मंदिर में प्रवेश करने से रोका था।
उन्होंने कहा कि यहां पर मंदिर की दीवारों पर लिखा हुआ था कि शूद्रों का प्रवेश मंदिर में निषेध है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस थाना कोट द्वारा मामले की जांच की गई और अदालत में बाबा केवल पूरी और हर केवल सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए गए।
जिस पर सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश बहादुर सिंह ने 3 अक्तूबर, 2018 को दोनों आरोपियों बाबा केवल पुरी और हर केवल सिंह को दोषी करार दिया था। दोनों को 10 अक्तूबर का दिन सजा के लिए निर्धारित किया गया है। सरकार की ओर से इस मामले की पेशी जिला न्यायवादी लोक अभियोजक संदीप अत्री द्वारा की गई।
उप-जिला न्यायवादी लोक अभियोजक बिलासपुर उमेश कुमार ने बताया कि कोर्ट ने बाबा केवल पुरी और एक अन्य व्यक्ति हर केवल सिंह को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निरोधक अधिनियम की धारा 3 के तहत दोषी करार देते हुए एक साल की सजा सुनाई है।