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पूर्व निदेशक के खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Thu, 02 Oct 2014 12:01 PM IST
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स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने भाषा कला एवं संस्कृति विभाग के एक पूर्व निदेशक के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। विजिलेंस को रिसर्च एंड वेलफेयर आर्गेनाइजेशन (आरडब्ल्यूओ) ने शिकायत कर जांच की मांग की थी।
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आर्गेनाइजेशन ने विभाग में किताबों के प्रकाशन में हुई अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सरकारी राशि का दुरुपयोग करने की बात कही है। आर्गेनाइजेशन ने विजिलेंस को दस्तावेज भी दिए हैं। इसके लिए विभाग के एक अन्य अधिकारी और मुद्रण का कार्य करने वाले एक व्यक्ति की मिलीभगत का आरोप है।
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मामला उजागर होने पर विभाग के दस्तावेजों से छेड़छाड़ करने के साथ-साथ फर्जी दस्तावेज तैयार करने का भी आरोप है। विभाग ने अप्रैल 2013 में एक पुस्तक प्रकाशित की थी। पुस्तक के प्रकाशन के लिए बनाई गई चार सदस्यीय विभागीय प्रकाशन समिति को ही नजरअंदाज कर दिया गया जिसके अध्यक्ष भाषा एवं संस्कृति के प्रधान सचिव और सचिव, भाषा एवं संस्कृति विभाग के निदेशक होते हैं।
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समिति में हिमाचल प्रदेश सरकार के वित्त विभाग का एक प्रतिनिधि और हिमाचल प्रदेश मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग के नियंत्रक सदस्य के रूप में होते हैं। विभाग के पूर्व निदेशक इस विभागीय प्रकाशन समिति को नजरअंदाज कर इसके स्थान पर विभाग के अधिकारियों व तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों की समिति बनाने के भी आरोप हैं। आर्गेनाइजेशन ने एडीजीपी को यह शिकायत की है। मामले की जांच एसपी एसआईयू वीरेंद्र तोमर को सौंपी गई है।