CBI जांच में खुलासा, एक ही डिस्ट्रीब्यूटर पर मेहरबान रहा दूरदर्शन शिमला
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दूरदर्शन केंद्र शिमला में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में कई और खुलासे हो रहे हैं। यहां नियमों को ताक पर रखकर पिछले आठ साल में एक ही डिस्ट्रीब्यूटर पर मेहरबानी दिखाई गई।
इस समयावधि में बाहरी राज्य के इस डिस्ट्रीब्यूटर को फिल्म, सीरियल और अन्य कार्यक्रम प्रसारित करने की एवज में करोड़ों रुपये की रॉयल्टी जारी की गई। पूरा मामला वर्ष 2007 से वर्ष 2013 के बीच का है।
छापामारी के लिए दिल्ली से आई सीबीआई टीम शनिवार को लौट गई। सूत्रों के मुताबिक मामले की जांच का जिम्मा अब शिमला ब्रांच के पास रहेगा। दूरदर्शन शिमला के रिकॉर्ड रूम से सीबीआई ने पिछले आठ से दस साल का रिकॉर्ड जब्त किया है।
जब्त किए गए हैं ये सारे दस्तावेज
इसमें रॉयल्टी की राशि जारी करने से लेकर अनुबंध आधार पर रखे गए कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन सहित अन्य वित्तीय लेनदेन से संबंधित दस्तावेज शामिल हैं।
सीबीआई का पहला फोकस रॉयल्टी को लेकर जारी राशि के संदर्भ में पुख्ता सबूत जुटाने का है। इसके बाद अन्य पहलुओं पर भी गहनता से पड़ताल की जाएगी। सीबीआई पहले दस्तावेजों को खंगालेगी और उसके बाद केस दर्ज करने की प्रक्रिया अमल में लाएगी।
बताया जा रहा है कि आने वाले वक्त में दूरदर्शन शिमला के कई आला अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा। हालांकि, अभी प्रारंभिक जांच के कारण सीबीआई के अधिकारी इस संबंध में कुछ भी बोलने से इंकार कर रहे हैं।
गबन पर एसबीआई के पूर्व चीफ मैनेजर को तीन साल कैद
सीबीआई की विशेष अदालत ने एसबीआई हमीरपुर के पूर्व चीफ मैनेजर केसी तुंडकिया को करीब सवा करोड़ के गबन मामले में तीन साल की कैद का फैसला सुनाया है। चार साल तक मामले की सुनवाई के बाद स्पेशल जल पूने राम पहाड़िया की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
सीबीआई के अनुसार केसी तुंडकिया वर्ष 2010 से 2011 के बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया हमीरपुर शाखा में बतौर चीफ मैनेजर तैनात थे। इस दौरान उन्होंने सात टर्म लोन के फर्जी अकाउंट बनाए, इनके माध्यम से करीब 1.50 करोड़ रुपये के लोन मंजूर करवाए। जिन लोगों के नाम पर अकाउंट खोले गए, उन्हें इस बात की जानकारी तक नहीं थी।
इसके बाद दोषी ने उक्त रकम को अन्य अकाउंट में ट्रांसफर कर निकाल लिया। मामले की सूचना मिलते ही एसबीआई ने इस संबंध में केंद्रीय जांच एजेंसी को लिखित में शिकायत की। सीबीआई की शिमला ब्रांच ने मामले की जांच शुरू की और तथ्य पाए जाने पर तुंडकिया के खिलाफ धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग सहित अन्य विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।
सीबीआई ने मामले की जांच पूरी की और सीबीआई की विशेष अदालत में चालान पेश किया। इस दौरान जांच एजेंसी ने कुल 44 गवाहों के नाम अदालत के समक्ष रखे। मामले की सुनवाई करीब चार वर्ष तक चली और इस दौरान अदालत ने जांच एजेंसी की छानबीन और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपों को सही पाते हुए पद के दुरुपयोग और धोखाधड़ी करके फर्जी टर्म लोन अकाउंट खोलने सहित अन्य धाराओं के तहत तत्कालीन चीफ मैनेजर को तीन साल की सजा सुनाई है।