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मिंटो कोर्ट में आगजनी का नहीं खुलेगा राज
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Wed, 07 Jan 2015 02:49 PM IST
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सीबीआई ने शिमला बीआरओ के दीपक प्रोजेक्ट भवन में लगी आग पर बैठाई जांच को बंद कर दिया है। सीबीआई को इस प्रोजेक्ट भवन में जान-बूझकर आग लगाने के सबूत नहीं मिले हैं। इसी के बाद इस आग की घटना पर शुरू की गई जांच को बंद का दिया गया है।
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सूत्रों की मानें तो सीबीआई ने आग की इस घटना के बाद इस पर अपने स्तर पर एक जांच बैठाई थी। आशंका थी कि कहीं इस भवन में जान-बूझकर आग न लगाई गई हो। इस बारे में प्रोजेक्ट अधिकारियों और कर्मचारियों से भी सीबीआई ने पूछताछ की।
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प्रारंभिक जांच में सीबीआई को इस आग के जान-बूझकर लगाने के प्रथमदृष्टया सबूत नहीं मिल पाए। सूत्रों की मानें तो सीबीआई में दर्ज मामलों और कोर्ट में चल रहे मुकदमे से जुड़ा रिकॉर्ड पहले ही लिया जा चुका है। यह सीबीआई के ही कब्जे में है।
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नए रिकॉर्ड की सीबीआई को कोई जरूरत नहीं थी। दूसरी बात यह भी है कि जो रिकॉर्ड यहां बीआरओ मुख्यालय में रहता है, वह दो अन्य कार्यालयों में भी होता है। यानी बीआरओ का कोई भी रिकॉर्ड तीन-तीन कार्यालयों में जेनेरेट होता है।
ऐसे में रिकॉर्ड को जलाने का कोई मतलब नहीं है। इसके अलावा सीबीआई ने स्थानीय प्रशासन की जांच रिपोर्ट में भी ऐसे कोई तथ्य नहीं पाए हैं।
बीआरओ के दीपक प्रोजेक्ट भवन में आग दो महीने पहले एक नवंबर 2014 की रात लगी। इस भवन को मिंटो कोर्ट कहा जाता है। यह भवन अंग्रेजों के शासनकाल में 104 साल पूर्व बना था।
इस भवन के जलने से इस भवन में रखा सारा रिकॉर्ड जलकर राख हो गया। भवन जलने के बाद आशंका जताई गई कि अफसरों के खिलाफ चल रही जांच और मुकदमे के रिकॉर्ड को जलाने के लिए जान-बूझकर आग तो नहीं लगाई गई।