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Shimla News: नशे का आदी बनाने के लिए शादियों, जन्मदिन में फ्री में भेजा जाता था चिट्टा
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शाही महात्मा चिट्टा तस्कर गिरोह की जांच में पुलिस को मिले कई चौंकाने वाले तथ्य
युवाओं को नशे में धकेलने अपनाते थे इस तरह के हथकंडे
रोहड़ू और जुब्बल क्षेत्र में कई सालों से सक्रिय था गिरोह, पुलिस का दावा-करोड़ों की चिट्टा तस्करी को दे चुके हैं अंजाम
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले में पिछले कई सालों से चिट्टा तस्करी का नेटवर्क चला रहे शाही महात्मा गिरोह से जुड़े मामले की जांच में कई चाैंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस की जांच में पता चला है कि युवाओं को नशे के दलदल में धकेलने के लिए गिरोह कई तरीके से काम करता था। सूत्रों के मुताबिक शादियों और जन्मदिन की पार्टियों में फ्री में नशा भेजा जाता था। इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा युवाओं को नशे का आदी बनाना था, जिससे की चिट्टे का कारोबार चलता रहे। यह अंतरराज्यीय चिट्टा तस्कर गिरोह पिछले कई सालों से रोहड़ू, जुब्बल समेत आसपास के क्षेत्र में सक्रिय था। पुलिस का दावा है कि इन सालों में 5 से 7 करोड़ रुपये की चिट्टा तस्करी कर चुके हैं। गिरोह के मुख्य सरगना शाही महात्मा के मोबाइल से डाटा रिट्रीव करने के बाद आरोपियों और नशा खरीदने वालों के बीच हुई चेट के आधार पर पुलिस इस मामले की तह तक पहुंचने में जुटी हुई है।
जिला पुलिस के मुताबिक क्षेत्र में लंबे समय से यह नशा तस्करी का गिरोह चल रहा था। जब पुलिस ने मामले की जांच की तो गिरोह से जुड़े कई लोग उनके हत्थे चढ़े, लेकिन मुख्य सरगना शाही महात्मा उर्फ शशि नेगी पुलिस के हाथ नहीं आ रहा था। इसके बाद पुलिस ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स से मामले की जानकारी साझा की। दोनों एजेंसियों ने मिलकर मामले की जांच की। इस दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि नशे की खेप लेकर एक शख्स रोहड़ू की ओर आ रहा है। संयुक्त रूप से पुलिस ने कोटखाई के समीप नाका लगाया तो टैक्सी को तलाशी के लिए रोका गया। इस दौरान मुद्दसीर अहमद निवासी कुपवाड़ा जम्मू-कश्मीर की तलाशी लेने पर उसके कब्जे से 468 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया। जांच करने पर पता चला कि यह नशे की खेप शाही महात्मा के इशारे पर भेजी जा रही थी। इसके बाद पुलिस और एनटीएफ ने शाही महात्मा को पकड़ने में कामयाबी हासिल की। पुलिस के मुताबिक अभी तक गिरोह के 26 सदस्य गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इसमें सरगना का मुख्य साथी हरिंद्र मांटा भी शामिल है, जिसे पुलिस ने गिरिपुल से पकड़ने में कामयाबी हासिल की थी।
पुलिस के सूत्रों के मुताबिक गिरोह नशे के आदी युवाओं को व्हाट्सएप पर लोकेशन की वीडियो बनाकर भेजता था और इससे पहले ऑनलाइन पेमेंट ली जाती थी। पुलिस ने मामले में आरोपियों के खिलाफ वित्तीय जांच भी खोल दी है। इसमें नशे से अर्जित संपत्ति का पता लगाया जा रहा है।
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कोट्स
शाही महात्मा गिरोह पिछले कई सालों से क्षेत्र में सक्रिय था। जांच में पता चला है कि शादी और जन्मदिन की पार्टियों में फ्री में नशा भेजा जाता था। इसकी तरह पहली बार भी नशा करने वालों को मुफ्त में नशा दिया जाता था। इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा युवाओं को नशे का आदी बनाना था। पुलिस मामले में गहनता से जांच कर रही है। नशा तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
-संजीव कुमार गांधी, एसपी, शिमला
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युवाओं को नशे में धकेलने अपनाते थे इस तरह के हथकंडे
रोहड़ू और जुब्बल क्षेत्र में कई सालों से सक्रिय था गिरोह, पुलिस का दावा-करोड़ों की चिट्टा तस्करी को दे चुके हैं अंजाम
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले में पिछले कई सालों से चिट्टा तस्करी का नेटवर्क चला रहे शाही महात्मा गिरोह से जुड़े मामले की जांच में कई चाैंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस की जांच में पता चला है कि युवाओं को नशे के दलदल में धकेलने के लिए गिरोह कई तरीके से काम करता था। सूत्रों के मुताबिक शादियों और जन्मदिन की पार्टियों में फ्री में नशा भेजा जाता था। इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा युवाओं को नशे का आदी बनाना था, जिससे की चिट्टे का कारोबार चलता रहे। यह अंतरराज्यीय चिट्टा तस्कर गिरोह पिछले कई सालों से रोहड़ू, जुब्बल समेत आसपास के क्षेत्र में सक्रिय था। पुलिस का दावा है कि इन सालों में 5 से 7 करोड़ रुपये की चिट्टा तस्करी कर चुके हैं। गिरोह के मुख्य सरगना शाही महात्मा के मोबाइल से डाटा रिट्रीव करने के बाद आरोपियों और नशा खरीदने वालों के बीच हुई चेट के आधार पर पुलिस इस मामले की तह तक पहुंचने में जुटी हुई है।
जिला पुलिस के मुताबिक क्षेत्र में लंबे समय से यह नशा तस्करी का गिरोह चल रहा था। जब पुलिस ने मामले की जांच की तो गिरोह से जुड़े कई लोग उनके हत्थे चढ़े, लेकिन मुख्य सरगना शाही महात्मा उर्फ शशि नेगी पुलिस के हाथ नहीं आ रहा था। इसके बाद पुलिस ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स से मामले की जानकारी साझा की। दोनों एजेंसियों ने मिलकर मामले की जांच की। इस दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि नशे की खेप लेकर एक शख्स रोहड़ू की ओर आ रहा है। संयुक्त रूप से पुलिस ने कोटखाई के समीप नाका लगाया तो टैक्सी को तलाशी के लिए रोका गया। इस दौरान मुद्दसीर अहमद निवासी कुपवाड़ा जम्मू-कश्मीर की तलाशी लेने पर उसके कब्जे से 468 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया। जांच करने पर पता चला कि यह नशे की खेप शाही महात्मा के इशारे पर भेजी जा रही थी। इसके बाद पुलिस और एनटीएफ ने शाही महात्मा को पकड़ने में कामयाबी हासिल की। पुलिस के मुताबिक अभी तक गिरोह के 26 सदस्य गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इसमें सरगना का मुख्य साथी हरिंद्र मांटा भी शामिल है, जिसे पुलिस ने गिरिपुल से पकड़ने में कामयाबी हासिल की थी।
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पुलिस के सूत्रों के मुताबिक गिरोह नशे के आदी युवाओं को व्हाट्सएप पर लोकेशन की वीडियो बनाकर भेजता था और इससे पहले ऑनलाइन पेमेंट ली जाती थी। पुलिस ने मामले में आरोपियों के खिलाफ वित्तीय जांच भी खोल दी है। इसमें नशे से अर्जित संपत्ति का पता लगाया जा रहा है।
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शाही महात्मा गिरोह पिछले कई सालों से क्षेत्र में सक्रिय था। जांच में पता चला है कि शादी और जन्मदिन की पार्टियों में फ्री में नशा भेजा जाता था। इसकी तरह पहली बार भी नशा करने वालों को मुफ्त में नशा दिया जाता था। इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा युवाओं को नशे का आदी बनाना था। पुलिस मामले में गहनता से जांच कर रही है। नशा तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
-संजीव कुमार गांधी, एसपी, शिमला