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Shimla News: कालीबाड़ी मंदिर सड़क में दरारें बढ़ीं, एक हिस्सा धंसा
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हर रोज सैकड़ों लोग करते हैं आवाजाही
पिछले साल आ गई थी दरारें, प्रशासन ने नहीं दिया ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के कालीबाड़ी मंदिर और बैटनी कैसल के बीच की 100 मीटर लंबी सड़क पर दरारें पड़ गई हैं। इससे सड़क का कुछ हिस्सा धंस गया है। यह मार्ग न केवल शिमला के लोगों के लिए बल्कि हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
लोगों के अनुसार इस मार्ग पर पिछले साल से ही दरारें आने लगी थीं लेकिन प्रशासन ने नजरअंदाज किया। अब सड़क का एक हिस्सा धंस गया है। कालीबाड़ी मंदिर के लिए हर रोज सैकड़ों लोग इसी सड़क से होकर जाते हैं। बैटनी कैसल और कालीबाड़ी रास्ते के नीचे मजदूरों के बहुत पुराने ढारे बने हैं जिन्हें बड़ा करने के लिए की गई खुदाई को भी सड़क के धंसने का कारण बताया जा रहा है। वहीं आईजीएमसी कर्मचारी आवास के ढहे डंगे के मलबे को रोकने के लिए लोहे की चादरें लगाई हैं। पार्षद अतुल गौतम ने बताया कि इलाके में लगातार पत्थर गिरने का खतरा है। इसलिए लोहे की चादरें लगाई जा रही हैं।
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पिछले साल आ गई थी दरारें, प्रशासन ने नहीं दिया ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के कालीबाड़ी मंदिर और बैटनी कैसल के बीच की 100 मीटर लंबी सड़क पर दरारें पड़ गई हैं। इससे सड़क का कुछ हिस्सा धंस गया है। यह मार्ग न केवल शिमला के लोगों के लिए बल्कि हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
लोगों के अनुसार इस मार्ग पर पिछले साल से ही दरारें आने लगी थीं लेकिन प्रशासन ने नजरअंदाज किया। अब सड़क का एक हिस्सा धंस गया है। कालीबाड़ी मंदिर के लिए हर रोज सैकड़ों लोग इसी सड़क से होकर जाते हैं। बैटनी कैसल और कालीबाड़ी रास्ते के नीचे मजदूरों के बहुत पुराने ढारे बने हैं जिन्हें बड़ा करने के लिए की गई खुदाई को भी सड़क के धंसने का कारण बताया जा रहा है। वहीं आईजीएमसी कर्मचारी आवास के ढहे डंगे के मलबे को रोकने के लिए लोहे की चादरें लगाई हैं। पार्षद अतुल गौतम ने बताया कि इलाके में लगातार पत्थर गिरने का खतरा है। इसलिए लोहे की चादरें लगाई जा रही हैं।
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