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Shimla News: अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के खिलाफ माकपा का प्रदर्शन
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डीसी कार्यालय के बाहर की जमकर नारेबाजी
बोले, समझौते में दीं रियायतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) की लोकल कमेटी ने भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते के खिलाफ बुधवार को उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इसमें पार्टी के राज्य सचिवालय सदस्य डॉ. कुलदीप सिंह तंवर, जिला सचिव विजेंद्र मेहरा, लोकल कमेटी सचिव जगत राम, अमित कुमार और विवेक कश्यप ने कहा कि साम्राज्यवादी अमेरिका दूसरे देशों की संप्रभुता पर आक्रामक हमले कर रहा है।
पिछले 6 महीनों में अमेरिका बिना किसी युद्ध के 7 देशों पर 658 हवाई हमले कर चुका है। अमेरिका साम्राज्यवादी नीति को आक्रामक तरीके से बढ़ा रहा है। अमेरिका आर्थिक संकट को झेल रहा है, इसलिए अपने हितों को साधने के लिए दूसरे देशों पर अपनी नीतियों को थोप रहा है। अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार, व्यापक गैस क्षेत्र, महत्वपूर्ण सोने के भंडार और कोल्टान तथा थोरियम जैसे दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के भंडारों पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है। अन्य देशों पर सैन्य हमले और टैरिफ लगाकर अपने हितों को साधने का कार्य कर रहा है। भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने तथाकथित अंतरिम समझौते में संयुक्त राज्य अमेरिका को व्यापक रियायतें दी हैं। यह भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि और राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा हैं।
भारत ने अमेरिका से फलों, कपास, मेवों, सोयाबीन तेल और कुछ अन्य खाद्य तथा कृषि उत्पादों के निर्यात पर कोई टैरिफ (शून्य टैरिफ) नहीं लगाने पर सहमति व्यक्त की है। इससे भारत के लाखों सेब उत्पादकों, कपास और सोया किसानों की आजीविका पर संकट आएगा। हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और अन्य राज्यों में सेब किसान पहले से ही न्यूजीलैंड से समझौतों के तहत आने वाले सेब से नुकसान झेल रहे हैं।
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बोले, समझौते में दीं रियायतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) की लोकल कमेटी ने भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते के खिलाफ बुधवार को उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इसमें पार्टी के राज्य सचिवालय सदस्य डॉ. कुलदीप सिंह तंवर, जिला सचिव विजेंद्र मेहरा, लोकल कमेटी सचिव जगत राम, अमित कुमार और विवेक कश्यप ने कहा कि साम्राज्यवादी अमेरिका दूसरे देशों की संप्रभुता पर आक्रामक हमले कर रहा है।
पिछले 6 महीनों में अमेरिका बिना किसी युद्ध के 7 देशों पर 658 हवाई हमले कर चुका है। अमेरिका साम्राज्यवादी नीति को आक्रामक तरीके से बढ़ा रहा है। अमेरिका आर्थिक संकट को झेल रहा है, इसलिए अपने हितों को साधने के लिए दूसरे देशों पर अपनी नीतियों को थोप रहा है। अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार, व्यापक गैस क्षेत्र, महत्वपूर्ण सोने के भंडार और कोल्टान तथा थोरियम जैसे दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के भंडारों पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है। अन्य देशों पर सैन्य हमले और टैरिफ लगाकर अपने हितों को साधने का कार्य कर रहा है। भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने तथाकथित अंतरिम समझौते में संयुक्त राज्य अमेरिका को व्यापक रियायतें दी हैं। यह भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि और राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा हैं।
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भारत ने अमेरिका से फलों, कपास, मेवों, सोयाबीन तेल और कुछ अन्य खाद्य तथा कृषि उत्पादों के निर्यात पर कोई टैरिफ (शून्य टैरिफ) नहीं लगाने पर सहमति व्यक्त की है। इससे भारत के लाखों सेब उत्पादकों, कपास और सोया किसानों की आजीविका पर संकट आएगा। हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और अन्य राज्यों में सेब किसान पहले से ही न्यूजीलैंड से समझौतों के तहत आने वाले सेब से नुकसान झेल रहे हैं।
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