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Shimla News: बैंक को ऋण खाते में धांधली का दोषी ठहराने वाला आदेश रद्द
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एसबीआई को राज्य उपभोक्ता आयोग से मिली राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने होम लोन मामले में भारतीय स्टेट बैंक एसबीआई के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग सोलन के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें बैंक को ऋण खाते में धांधली का दोषी ठहराया गया था। सोलन निवासी डॉ. चमन शर्मा ने जून 2024 में एसबीआई से 4,60,000 रुपये का होम लोन फ्लोटिंग दर पर लिया था। समझौते के अनुसार ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के आधार पर ईएमआई में बदलाव होना था। 15 वर्षों तक शिकायतकर्ता की सैलरी अकाउंट से हर महीने 4,598 रुपये की किस्त स्वतः कटती रही। जून 2019 में जब ऋण अवधि पूरी होने वाली थी तब बैंक ने शिकायतकर्ता को सूचित किया कि उनके खाते में अभी भी 2,43,903 रुपये बकाया है। आयोग ने पाया कि बैंक की कोई गलती नहीं थी। उपभोक्ता ने बैंक पर गलत तरीके से अतिरिक्त ब्याज वसूलने का आरोप लगाते हुए जिला आयोग में शिकायत की थी जिसे पहले मंजूर कर लिया गया था। हालांकि, राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश इंद्र सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि बैंक द्वारा रिकॉर्ड पर लाए गए दस्तावेजों से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता को समय-समय पर ब्याज दरों में बदलाव की जानकारी दी गई थी।
शिकायतकर्ता ने स्वयं जो स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट कि पेश किया उसमें भी ब्याज दरों का विवरण मौजूद था। शिकायतकर्ता ने ब्याज दरें बढ़ने के बावजूद अपनी ईएमआई नहीं बढ़ाई और फिक्स्ड राशि ही जमा करता रहा जिसके कारण बकाया राशि जमा हुई। राज्य आयोग ने स्पष्ट किया कि बैंक की ओर से सेवा में कोई कमी नहीं पाई गई है। इसी के साथ आयोग ने बैंक की अपील को स्वीकार करते हुए जिला आयोग के आदेश को खारिज कर दिया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने होम लोन मामले में भारतीय स्टेट बैंक एसबीआई के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग सोलन के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें बैंक को ऋण खाते में धांधली का दोषी ठहराया गया था। सोलन निवासी डॉ. चमन शर्मा ने जून 2024 में एसबीआई से 4,60,000 रुपये का होम लोन फ्लोटिंग दर पर लिया था। समझौते के अनुसार ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के आधार पर ईएमआई में बदलाव होना था। 15 वर्षों तक शिकायतकर्ता की सैलरी अकाउंट से हर महीने 4,598 रुपये की किस्त स्वतः कटती रही। जून 2019 में जब ऋण अवधि पूरी होने वाली थी तब बैंक ने शिकायतकर्ता को सूचित किया कि उनके खाते में अभी भी 2,43,903 रुपये बकाया है। आयोग ने पाया कि बैंक की कोई गलती नहीं थी। उपभोक्ता ने बैंक पर गलत तरीके से अतिरिक्त ब्याज वसूलने का आरोप लगाते हुए जिला आयोग में शिकायत की थी जिसे पहले मंजूर कर लिया गया था। हालांकि, राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश इंद्र सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि बैंक द्वारा रिकॉर्ड पर लाए गए दस्तावेजों से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता को समय-समय पर ब्याज दरों में बदलाव की जानकारी दी गई थी।
शिकायतकर्ता ने स्वयं जो स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट कि पेश किया उसमें भी ब्याज दरों का विवरण मौजूद था। शिकायतकर्ता ने ब्याज दरें बढ़ने के बावजूद अपनी ईएमआई नहीं बढ़ाई और फिक्स्ड राशि ही जमा करता रहा जिसके कारण बकाया राशि जमा हुई। राज्य आयोग ने स्पष्ट किया कि बैंक की ओर से सेवा में कोई कमी नहीं पाई गई है। इसी के साथ आयोग ने बैंक की अपील को स्वीकार करते हुए जिला आयोग के आदेश को खारिज कर दिया है।
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