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Shimla News: बहू को आत्मनिर्भर बनाने के लिए खाली करानी होगी दुकान, किरायेदार की अपील खारिज

Sun, 13 Sep 2026 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 13 Sep 2026 11:55 PM IST
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ससुर की संपत्ति में बहू का रोजगार स्थापित करना वास्तविक जरूरत
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। बहू को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए दुकान की जरूरत को अदालत ने मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता (बोनाफाइड रिक्वायरमेंट) मानते हुए किरायेदार की अपील खारिज कर दी है। शिमला स्थित जिला अपीलीय प्राधिकरण (III) के न्यायाधीश अजय मेहता की अदालत ने लोअर खलीनी क्षेत्र से जुड़े एक बेदखली मामले में रेंट कंट्रोलर कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए यह आदेश पारित किया।
लोअर खलीनी, भगवती नगर स्थित रूप भवन के मालिक रूप राम ने अपनी एक दुकान को खाली करवाने के लिए रेंट कंट्रोलर के समक्ष याचिका दायर की थी। उन्होंने दलील दी थी कि उनकी बहू ने कंप्यूटर ऑपरेटर एवं प्रोग्रामिंग असिस्टेंट का कोर्स किया है और वह स्वरोजगार के लिए वहां कंप्यूटर सेंटर शुरू करना चाहती है। इसके अलावा कोई अन्य उपयुक्त जगह खाली नहीं है। साथ ही किरायेदार पर अगस्त 2022 से किराया बकाया होने का भी आरोप लगाया गया।
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रेंट कंट्रोलर कोर्ट ने इन आधारों पर याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए किरायेदार को दुकान खाली करने और बकाया किराया अदा करने के आदेश दिए थे। इस फैसले के खिलाफ किरायेदार गीता राम ने अपीलीय अदालत में याचिका दायर की थी। अपीलीय अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि मकान मालिक की व्यक्तिगत जरूरत का दायरा केवल उसके खुद तक सीमित नहीं है। भारतीय सामाजिक परिवेश में परिवार के आश्रित सदस्यों और साथ रहने वाले परिजनों जिसमें बहू भी शामिल है, उसको आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता मकान मालिक की अपनी जरूरत के दायरे में आती है।
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अदालत ने पाया कि बहू का कौशल विकास मंत्रालय से जारी प्रमाण पत्र रिकॉर्ड पर मौजूद है जिससे साबित होता है कि वह कंप्यूटर सेंटर चलाने के लिए योग्य है। इसके अलावा किरायेदार यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि मकान मालिक के पास उस इमारत में कोई अन्य खाली दुकान उपलब्ध है।

अदालत ने कहा कि मकान मालिक अपनी संपत्ति के इस्तेमाल और जरूरत का सबसे बेहतर निर्णायक होता है। इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने रेंट कंट्रोलर कोर्ट नंबर-1 के 26 मार्च 2025 के निर्णय को पूरी तरह कानूनी और सही ठहराते हुए किरायेदार की अपील को खारिज कर दिया।
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