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Shimla News: बीमा कंपनी की अपील खारिज, मां को मिलेगा दो लाख का क्लेम
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जिला उपभोक्ता आयोग धर्मशाला के फैसले को सही ठहराया
रुचि सांख्यान
शिमला। पुख्ता सबूतों और मेडिकल प्रक्रिया के स्पष्ट प्रमाण के बिना केवल शराब पीने के संदेह के आधार पर बीमा क्लेम खारिज करना बीमा कंपनी को महंगा पड़ गया। हिमाचल प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की अपील को खारिज करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग, कांगड़ा (धर्मशाला) के फैसले को सही ठहराया है। राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंद्र सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की पीठ ने मृतक की मां को 2 लाख रुपये का क्लेम 9 प्रतिशत ब्याज सहित अदा करने के आदेश पर अपनी मुहर लगाई है। कांगड़ा जिले के शाहपुर तहसील के गांव बगरू निवासी पंकज उर्फ कश्मीर चंद का खाता हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक की शाखा हटली में था।
उन्होंने बैंक के जरिए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में बीमा करवा रखा था जिसका प्रीमियम उनके खाते से कटता था। 29 अप्रैल 2022 को शाहपुर के पास सड़क हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और 1 मई 2022 को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद पुलिस थाना शाहपुर में कार चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। मृतक की मां मधु बाला ने नॉमिनी के तौर पर दो लाख रुपये के बीमा क्लेम के लिए सभी दस्तावेज जमा कराए, लेकिन बीमा कंपनी ने 1 मार्च 2023 को यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि आरएफएसएल रिपोर्ट के अनुसार मृतक के खून में 25.43 प्रतिशत एथिल अल्कोहल पाया गया था और वह बिना वैध दस्तावेजों के बाइक चला रहा था जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है।
पीड़िता ने जिला उपभोक्ता आयोग, कांगड़ा में शिकायत दर्ज कराई। जिला आयोग ने 27 जुलाई 2024 को फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को शिकायत दर्ज होने की तारीख (1 जून 2023) से 9 प्रतिशत ब्याज सहित दो लाख का क्लेम और 10,000 मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया था। साथ ही शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी के लिए बैंक को 5,000 और बीमा कंपनी को 10,000 का मुआवजा देने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ बीमा कंपनी ने राज्य आयोग में अपील दायर की थी।
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राज्य उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में कहा कि पॉलिसी की शर्तों के उल्लंघन को साबित करने का पूरा जिम्मा बीमा कंपनी पर था। आयोग ने पाया कि एमएलसी पर किसी रोहित नाम के व्यक्ति के हस्ताक्षर थे जबकि डॉक्टर ने लिखा था कि मरीज अस्पताल लाते वक्त बेहोश था। इससे यह गहरा संदेह पैदा होता है कि खून का सैंपल मृतक का था या रोहित का।
बीमा कंपनी ने न तो सैंपल लेने वाले डॉक्टर का हलफनामा पेश किया और न ही मालखाने से आरएफएसएल धर्मशाला तक सैंपल ले जाने वाले व्यक्ति का बयान दर्ज कराया जिससे साबित हो सके कि सैंपल से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई। आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल खून में अल्कोहल की मौजूदगी का हवाला देना काफी नहीं है जब तक यह साबित न हो कि सैंपल सही तरीके से लिया, सुरक्षित रखा गया था और हादसे की मुख्य वजह शराब थी। एफआईआर के मुख्य चश्मदीद गवाह का हलफनामा भी कंपनी ने पेश नहीं किया जिससे यह साबित हो सके कि घटना के समय वास्तव में मृतक ही बाइक चला रहा था।
आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से क्लेम खारिज किए जाने को सेवा में गंभीर कोताही मानते हुए निचली अदालत के फैसले में किसी भी हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया और बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी।
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शिमला। पुख्ता सबूतों और मेडिकल प्रक्रिया के स्पष्ट प्रमाण के बिना केवल शराब पीने के संदेह के आधार पर बीमा क्लेम खारिज करना बीमा कंपनी को महंगा पड़ गया। हिमाचल प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की अपील को खारिज करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग, कांगड़ा (धर्मशाला) के फैसले को सही ठहराया है। राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंद्र सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की पीठ ने मृतक की मां को 2 लाख रुपये का क्लेम 9 प्रतिशत ब्याज सहित अदा करने के आदेश पर अपनी मुहर लगाई है। कांगड़ा जिले के शाहपुर तहसील के गांव बगरू निवासी पंकज उर्फ कश्मीर चंद का खाता हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक की शाखा हटली में था।
उन्होंने बैंक के जरिए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में बीमा करवा रखा था जिसका प्रीमियम उनके खाते से कटता था। 29 अप्रैल 2022 को शाहपुर के पास सड़क हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और 1 मई 2022 को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद पुलिस थाना शाहपुर में कार चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। मृतक की मां मधु बाला ने नॉमिनी के तौर पर दो लाख रुपये के बीमा क्लेम के लिए सभी दस्तावेज जमा कराए, लेकिन बीमा कंपनी ने 1 मार्च 2023 को यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि आरएफएसएल रिपोर्ट के अनुसार मृतक के खून में 25.43 प्रतिशत एथिल अल्कोहल पाया गया था और वह बिना वैध दस्तावेजों के बाइक चला रहा था जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है।
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पीड़िता ने जिला उपभोक्ता आयोग, कांगड़ा में शिकायत दर्ज कराई। जिला आयोग ने 27 जुलाई 2024 को फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को शिकायत दर्ज होने की तारीख (1 जून 2023) से 9 प्रतिशत ब्याज सहित दो लाख का क्लेम और 10,000 मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया था। साथ ही शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी के लिए बैंक को 5,000 और बीमा कंपनी को 10,000 का मुआवजा देने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ बीमा कंपनी ने राज्य आयोग में अपील दायर की थी।
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राज्य उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में कहा कि पॉलिसी की शर्तों के उल्लंघन को साबित करने का पूरा जिम्मा बीमा कंपनी पर था। आयोग ने पाया कि एमएलसी पर किसी रोहित नाम के व्यक्ति के हस्ताक्षर थे जबकि डॉक्टर ने लिखा था कि मरीज अस्पताल लाते वक्त बेहोश था। इससे यह गहरा संदेह पैदा होता है कि खून का सैंपल मृतक का था या रोहित का।
बीमा कंपनी ने न तो सैंपल लेने वाले डॉक्टर का हलफनामा पेश किया और न ही मालखाने से आरएफएसएल धर्मशाला तक सैंपल ले जाने वाले व्यक्ति का बयान दर्ज कराया जिससे साबित हो सके कि सैंपल से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई। आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल खून में अल्कोहल की मौजूदगी का हवाला देना काफी नहीं है जब तक यह साबित न हो कि सैंपल सही तरीके से लिया, सुरक्षित रखा गया था और हादसे की मुख्य वजह शराब थी। एफआईआर के मुख्य चश्मदीद गवाह का हलफनामा भी कंपनी ने पेश नहीं किया जिससे यह साबित हो सके कि घटना के समय वास्तव में मृतक ही बाइक चला रहा था।
आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से क्लेम खारिज किए जाने को सेवा में गंभीर कोताही मानते हुए निचली अदालत के फैसले में किसी भी हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया और बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी।