शिमला। राजधानी में फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक लोन लेने के मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट नंबर-1, शिमला प्रतिभा नेगी की अदालत ने फैसला सुनाते हुए शिमला निवासी आरोपी विक्रम जीत सिंह और सोलन निवासी हरीश कुमार उर्फ संजू दोनों को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने पर्याप्त सबूतों और पुख्ता कड़ियों के अभाव में यह फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 3 दिसंबर 2012 को स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, द मॉल शिमला के मुख्य प्रबंधक आरके गर्ग ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि 6 नवंबर 2006 को आरोपी विक्रम जीत सिंह ने खुद को लोक निर्माण विभाग का क्लर्क बताकर 1,10,000 रुपये का व्यक्तिगत ऋण लिया था। ऋण सुरक्षित करने के लिए कथित तौर पर जाली वेतन प्रमाण पत्र और डीडीओ का अंडरटेकिंग पत्र सौंपा गया था। बाद में जब ऋण की अदायगी में डिफॉल्ट हुआ और बैंक ने संबंधित डीडीओ से पत्राचार किया तो पता चला कि आरोपी कभी इस विभाग में कर्मचारी रहा ही नहीं और न ही ऐसा कोई प्रमाण पत्र जारी किया गया था। पुलिस ने जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत चालान अदालत में पेश किया था। अदालत ने कहा कि एसएफएसएल की रिपोर्ट को बिना किसी स्वतंत्र और प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य सबूत मामले में ऋण वर्ष 2006 में लिया गया था और जून 2008 में बैंक को कथित फर्जीवाड़े की जानकारी मिल गई थी, लेकिन पुलिस में शिकायत दर्ज कराने में करीब चार साल (2012 में) की लंबी देरी की गई जिसका कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। संवाद