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भाखड़ा बांध विस्थापितों के अवैध कब्जे हटाने पर रोक, सरकार से मांगा शपथ पत्र

Fri, 10 Aug 2018 09:47 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 10 Aug 2018 09:47 PM IST
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court imposed ban on removal of illegal possession of Bhakra Dam migrants

हिमाचल उच्च न्यायालय ने भाखड़ा बांध विस्थापितों के खिलाफ कथित अवैध कब्जों पर होने वाली कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने राजेंद्र कुमार की दायर याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किए।

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सरकार को 8 सप्ताह में शपथपत्र दाखिल करने का समय दिया है। प्रार्थी ने याचिका में कहा है कि भाखड़ा बांध को बनाने के लिए राज्य सरकार ने उनकी भूमि का अधिग्रहण किया था। वर्ष 1958 में प्रार्थी के पिता को विस्थापित होने के कारण एक प्लॉट आवंटित किया गया।
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प्रार्थी के पिता ने उसके साथ लगती जमीन को भी रोजमर्रा के उपयोग में ले लिया। उस जमीन पर मकान एवं दुकान को नियमित करने करने के लिए बनाई विशेष नियमितीकरण नीति के तहत आवेदन दिया।
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अब राज्य सरकार ने उस हिस्से को नियमित करने के बजाय उन्हें उस जगह से हटाने के नोटिस जारी कर दिए हैं। जबकि यह नीति भाखड़ा बांध विस्थापितों के हित को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। ऐसा करने से पूर्व प्रार्थी को सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया।

ऊना के सदाशिव मंदिर ध्यूंयर  के अधिग्रहण पर रोक से इंकार

court imposed ban on removal of illegal possession of Bhakra Dam migrants

 प्रदेश हाईकोर्ट ने ऊना जिले के बंगाणा स्थित सदाशिव महादेव मंदिर ध्यूंसर के अधिग्रहण पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। कोर्ट ने सरकार से सोमवार तक याचिका का जवाब तलब किया है। मामले पर सुनवाई 13 अगस्त को होगी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने सदाशिव मंदिर चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिका पर सुनवाई के बाद कहा कि मंदिर के सभी कार्य कानून के अनुसार चलाए जाएं।

कोर्ट ने भाषा कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव और निदेशक सहित मंदिर के आयुक्त को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता ने चिंतपूर्णी से विधायक बलबीर सिंह को भी निजी तौर पर प्रतिवादी बनाया है।

प्रार्थी ट्रस्ट का आरोप है कि सरकार ने इस मंदिर का अधिग्रहण विधायक बलबीर और बंगाणा के विधायक वीरेंद्र कंवर के दबाव में आकर किया है। यह मंदिर ट्रस्ट का निजी मंदिर है और यह ट्रस्ट श्रद्धालुओं की अपेक्षाओं के अनुसार काम कर रहा है।

सरकार के पास ऐसी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है, जिसके आधार पर इस मंदिर का अधिग्रहण किया गया। सरकार की यह सोच असंवैधानिक है। मंदिरों के कार्यक्रमों में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। राज्य सरकार ने हाल ही में इस मंदिर के अधिग्रहण का फैसला राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया था। 

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