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Shimla News: चेक बाउंस मामले में एक साल कैद और 2.54 लाख जुर्माने की सजा बरकरार
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वर्ष 2018 में दोषी ने लिया था दो लाख रुपये का ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सत्र अदालत शिमला ने चेक बाउंस के मामले में दोषी की अपील को खारिज करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिमला की ओर से सुनाई गई सजा के आदेश को बरकरार रखा है। सत्र न्यायाधीश भुवनेश अवस्थी की अदालत ने दोषी की अपील को अस्वीकार करते हुए उसे एक साल के साधारण कारावास और शिकायतकर्ता को 2,54,000 रुपये का मुआवजा अदा करने के आदेश की पुष्टि की है।
मामले के अनुसार, लक्कड़ बाजार निवासी व रोमी टूर एंड ट्रेवल्स के संचालक राकेश कपूर ने अदालत में शिकायत दायर की थी कि रामपुर निवासी दोषी सुंदर सिंह ने वर्ष 2018 में उनसे 2,00,000 रुपये की वित्तीय मदद ली थी। तय समय बीतने के बाद शिकायतकर्ता ने जब अपनी रकम वापस मांगी तो कानूनी देनदारी चुकाने के लिए आरोपी ने 25 नवंबर 2020 को देना बैंक शाखा रामपुर बुशहर का 2,00,000 रुपये का चेक जारी किया। शिकायतकर्ता ने जब यह चेक बैंक में भुगतान के लिए लगाया तो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण चेक 5 जनवरी 2021 को बाउंस हो गया। इसके बाद कानूनी मांग नोटिस भेजे जाने के बावजूद आरोपी ने तय अवधि में राशि का भुगतान नहीं किया जिसके चलते शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
निचली अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए एक साल के साधारण कारावास और 2,54,000 रुपये मुआवजे की सजा सुनाई थी।
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इस फैसले के खिलाफ दोषी ने सत्र अदालत में अपील दायर की। दोषी का तर्क था कि उसने केवल 1,00,000 रुपये लिए थे जिसे वह दे चुका है और चेक केवल सुरक्षा (सिक्योरिटी) के तौर पर दिया गया था जिसका गलत इस्तेमाल किया गया।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि चेक पर आरोपी के हस्ताक्षर और चेक का अनादर होना साबित है। अदालत ने कहा कि आरोपी यह साबित करने में विफल रहा कि 25 नवंबर 2020 को चेक जारी करने के बाद उसने कोई भुगतान किया हो।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सत्र अदालत शिमला ने चेक बाउंस के मामले में दोषी की अपील को खारिज करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिमला की ओर से सुनाई गई सजा के आदेश को बरकरार रखा है। सत्र न्यायाधीश भुवनेश अवस्थी की अदालत ने दोषी की अपील को अस्वीकार करते हुए उसे एक साल के साधारण कारावास और शिकायतकर्ता को 2,54,000 रुपये का मुआवजा अदा करने के आदेश की पुष्टि की है।
मामले के अनुसार, लक्कड़ बाजार निवासी व रोमी टूर एंड ट्रेवल्स के संचालक राकेश कपूर ने अदालत में शिकायत दायर की थी कि रामपुर निवासी दोषी सुंदर सिंह ने वर्ष 2018 में उनसे 2,00,000 रुपये की वित्तीय मदद ली थी। तय समय बीतने के बाद शिकायतकर्ता ने जब अपनी रकम वापस मांगी तो कानूनी देनदारी चुकाने के लिए आरोपी ने 25 नवंबर 2020 को देना बैंक शाखा रामपुर बुशहर का 2,00,000 रुपये का चेक जारी किया। शिकायतकर्ता ने जब यह चेक बैंक में भुगतान के लिए लगाया तो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण चेक 5 जनवरी 2021 को बाउंस हो गया। इसके बाद कानूनी मांग नोटिस भेजे जाने के बावजूद आरोपी ने तय अवधि में राशि का भुगतान नहीं किया जिसके चलते शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
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निचली अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए एक साल के साधारण कारावास और 2,54,000 रुपये मुआवजे की सजा सुनाई थी।
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इस फैसले के खिलाफ दोषी ने सत्र अदालत में अपील दायर की। दोषी का तर्क था कि उसने केवल 1,00,000 रुपये लिए थे जिसे वह दे चुका है और चेक केवल सुरक्षा (सिक्योरिटी) के तौर पर दिया गया था जिसका गलत इस्तेमाल किया गया।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि चेक पर आरोपी के हस्ताक्षर और चेक का अनादर होना साबित है। अदालत ने कहा कि आरोपी यह साबित करने में विफल रहा कि 25 नवंबर 2020 को चेक जारी करने के बाद उसने कोई भुगतान किया हो।