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Shimla News: हादसे की झूठी कहानी गढ़कर 26 लाख का क्लेम मांगना पड़ा भारी, शिकायत खारिज

Sun, 06 Sep 2026 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Sep 2026 11:55 PM IST
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court decession shimla
बंद गाड़ी में नहीं खुलते एयरबैग, सफाई के दौरान खाई में लुढ़कने का दावा निकला फर्जी
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रुचि सांख्यान
शिमला। सड़क हादसे के कारणों और चालक को लेकर झूठी कहानी बनाकर बीमा क्लेम ऐंठने की कोशिश उपभोक्ता आयोग में नाकाम साबित हुई है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, शिमला ने बीमा कंपनी की ओर से 26 लाख रुपये से अधिक का क्लेम खारिज किए जाने के फैसले को सही ठहराते हुए उपभोक्ता की शिकायत को सिरे से खारिज कर दिया है।

आयोग ने स्पष्ट किया कि फोरेंसिक रिपोर्ट और तकनीकी साक्ष्यों के आगे शिकायतकर्ता की मनगढ़ंत दलीलें टिक नहीं सकीं। यह निर्णय आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने सुनाया है। चिड़गांव निवासी अनिल कुमार ने एचडीएफसी जनरल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ आयोग में परिवाद दायर किया था। उन्होंने दावा किया था कि उनकी गाड़ी 15 जनवरी 2023 को चिड़गांव के वर्मा कैंची के पास खड़ी थी। हैंडब्रेक लगाने और पहिये के नीचे पत्थर लगाने के बाद उनके चचेरे भाई यशपाल बाहर से और पिता श्याम लाल अंदर से गाड़ी की सफाई कर रहे थे। इसी दौरान गाड़ी अचानक अनियंत्रित होकर करीब 700 मीटर गहरी खाई में जा गिरी जिससे उनके पिता गंभीर रूप से घायल हो गए और वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। उन्होंने कंपनी से ब्याज सहित 26,28,448 रुपये की भरपाई की मांग की थी। बीम कंपनी ने क्लेम खारिज करने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने हादसे के तथ्य छिपाए और गलत बयानी की। कंपनी ने मामले की पड़ताल के लिए सर्वेक्षक, जांच अधिकारी के साथ-साथ मुंबई फोरेंसिक से रिकंस्ट्रक्शन जांच करवाई थी। फोरेंसिक जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। हादसे के वक्त गाड़ी के एयरबैग खुले पाए गए। ऑटोमोबाइल तकनीक के अनुसार जब तक गाड़ी का इग्निशन (इंजन/सिस्टम) चालू न हो, तब तक एयरबैग खुलना मुमकिन ही नहीं है। इससे साबित हुआ कि हादसा रुकने या सफाई के वक्त नहीं बल्कि गाड़ी चालू और गतिमान अवस्था में हुआ। घायल श्याम लाल के सीने में लगी चोटें स्टीयरिंग व्हील से टकराने की ओर इशारा करती हैं। इससे यह साबित हुआ कि हादसे के वक्त वे अंदर सफाई नहीं कर रहे थे बल्कि स्वयं ड्राइविंग सीट पर मौजूद थे। आयोग ने दस्तावेजों के अध्ययन के बाद कहा कि शिकायतकर्ता हादसे के वक्त मौके पर मौजूद ही नहीं था बल्कि सूचना मिलने पर बाद में पहुंचा था। घटना के मुख्य चश्मदीद उसके पिता श्याम लाल और चचेरा भाई यशपाल थे लेकिन शिकायतकर्ता ने उनका कोई हलफनामा तक आयोग में पेश नहीं किया। वहीं दूसरी ओर, बीमा कंपनी ने सर्वेक्षक और फोरेंसिक विशेषज्ञों के हलफनामे व विस्तृत वैज्ञानिक साक्ष्य पेश किए, जिन्हें शिकायतकर्ता गलत साबित नहीं कर सका। आयोग ने माना कि उपभोक्ता ने हादसे के कारणों और वाहन चालक के संबंध में भ्रामक तथ्य पेश कर पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन किया है। लिहाजा, बीमा कंपनी की ओर से क्लेम खारिज करना पूरी तरह जायज था।
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