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छात्रवृत्ति घोटाला : एचजीपीआई के एमडी को भगोड़ा घोषित करने की उद्घोषणा

Thu, 04 Sep 2025 11:58 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 04 Sep 2025 11:58 PM IST
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court decession in schoilarship froud
एक्सक्लूसिव
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शिमला के विशेष न्यायाधीश दविंदर कुमार की अदालत ने जारी किए आदेश, गैर जमानती वारंट के बाद भी अदालत में नहीं हुए पेश
19 जुलाई 2019 को दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले के तहत कर रही ईडी जांच
दीपक मेहता
शिमला। बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले के धन शोधन मामले के आरोपी कालाअंब स्थित हिमालयन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस (एचजीपीआई) के एमडी रजनीश बंसल को भगोड़ा घोषित करने के लिए शिमला की विशेष अदालत ने उद्घोषणा प्रकाशित की है। आरोपी रजनीश गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी होने के बाद भी अदालत में हाजिर नहीं हुआ। दलील दी गई कि आरोपी फरार हो गया है या स्वयं को छिपा रहा है। अब न्यायाधीश दविंदर कुमार ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दायर आवेदन को स्वीकार करते हुए आरोपी के विरुद्ध उद्घोषणा जारी करने के आदेश दिए हैं।
कथित अपराध वर्ष 2014-15 का है। हिमाचल प्रदेश में एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग के छात्रों की करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति का सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से निजी विश्वविद्यालय संचालकों ने घोटाला किया है। ईडी के आरोपपत्र के मुताबिक आरोपी रजनीश के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत उक्त मामले में हिमालयन ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशंस और एपेक्स ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशंस (एजीपीआई) सहित 22 निजी संस्थानों में तलाशी और जब्ती की गई थी। 8 अप्रैल 2022 को सीबीआई ने रजनीश को गिरफ्तार किया था। 18 अप्रैल को सीबीआई ने आरोपी के खिलाफ दो अलग-अलग मामले दर्ज किए। इसमें रजनीश बंसल (एपेक्स ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशंस, इंद्री, करनाल के अध्यक्ष) के साथ 14 अन्य को आरोपी बनाया गया था। एचजीपीआई का प्रबंधन मां सरस्वती एजुकेशनल ट्रस्ट और एजीपीआई का प्रबंधन पीपल वेलफेयर एजुकेशन ट्रस्ट के तहत होता है। आरोप है कि रजनीश इन ट्रस्टों के तहत आने वाले कॉलेजों के बैंक खातों के संचालन को नियंत्रित करता था और एचजीपीआई और एजीपीआई के माध्यम से 2798 दावों की छात्रवृत्ति से 18,29,31,935 रुपये की आपराधिक आय अर्जित की है।
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मामले में 8 साल में कब-कब क्या हुआ
16 नवंबर 2018 को पुलिस थाना छोटा शिमला में मामले के मुख्य आरोपी अरविंद राज्टा सहित अन्य के खिलाफ मामला पंजीकृत किया गया। 7 मई 2019 को यह मामला सीबीआई को स्थानांतरित किया गया। 19 जुलाई 2019 से ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामले की जांच शुरू की। 29 अगस्त 2023 को ईडी ने आरोपी रजनीश बंसल के परिसर में धन शोधन के तहत तलाशी ली। कई बार रजनीश को पूछताछ के ईडी ने तलब किया। 29 जनवरी 2025 को ईडी ने रजनीश की पंचकूला स्थित कोठी में रेड कर उसके भाई विकास बंसल और डॉ. गुलशन शर्मा को गिरफ्तार किया। इस दौरान अदालत ने रजनीश की अंतरिम जमानत की याचिका को खारिज किया। 9 मई 2024 को रजनीश को उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई। इस दौरान भी पूछताछ के लिए रजनीश के खिलाफ ईडी ने पांच समन जारी किए लेकिन उपस्थित होने में विफल रहा। 12 मार्च 2025 को रजनीश के खिलाफ ओपन-एंडेड गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया गया। दलील दी गई कि रजनीश कानूनी प्रक्रिया से बच रहा है। इसी दौरान आरोपी रजनीश कुरक्षेत्र, पंचकूला और सिरमौर के आवासीय और आधिकारिक पतों में नहीं मिला।
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