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Shimla News: बीमा कंपनी को चुकाने होंगे 9.09 लाख, आयोग ने सेवा में कमी का दोषी ठहराया

Sun, 05 Oct 2025 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Oct 2025 11:55 PM IST
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court decession in favor of vehicle owner
अगस्त 2021 में उपमंडल रामपुर में वाहन हुआ था दुर्घटनाग्रस्त, कंपनी ने वाहन मालिक के दावे को किया था खारिज
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आयोग ने 45 दिन के भीतर मानसिक पीड़ा और मुकदमेबाजी के भी 25,000 रुपये देने के दिए निर्देश
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह की पीठ ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला उपभोक्ता आयोग ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को वाहन बीमा दावा निपटाने में की गई लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह ने कंपनी को शिकायतकर्ता को 9.09 लाख की राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिया है। साथ ही मानसिक उत्पीड़न के लिए 15,000 और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 10,000 रुपये देने होंगे। आयोग ने बीमा कंपनी को 45 दिन के भीतर अनुपालन करने के निर्देश दिए हैं। बशर्ते कि शिकायतकर्ता रद्द की गई आरसी कंपनी को जमा करवाए।

जिले के उपमंडल रामपुर निवासी शिकायतकर्ता अर्जुन ने अपने वाहन का बीमा न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी से कराया था। पॉलिसी 28 मार्च 2019 से 27 मार्च 2022 तक वैध थी। 19/20 अगस्त 2021 की रात को लवण सदाना गांव के पास वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। सूचना बीमा कंपनी और पुलिस को दी गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, कंपनी के सर्वेयर ने मौके पर रिपोर्ट तैयार की और वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त घोषित किया, लेकिन छह माह तक दावा लंबित रहा। कंपनी ने दावा यह कहकर खारिज कर दिया कि शिकायतकर्ता ने वाहन अपने चचेरे भाई देवी दास को बेच दिया था और यह तथ्य बीमा लेते समय छिपाया गया। कंपनी के अनुसार बिक्री समझौते के बाद शिकायतकर्ता का बीमा योग्य हित समाप्त हो गया और वह अब वाहन का मालिक नहीं रहा। उधर, शिकायतकर्ता ने कहा कि वाहन पर महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंस सर्विस लिमिटेड का ऋण चल रहा था, इसलिए कानूनी रूप से किसी अन्य व्यक्ति के नाम ट्रांसफर किया ही नहीं जा सकता था। कथित विक्रय समझौता बाद में रद्द कर दिया गया था। आयोग ने पाया कि वाहन की पंजीकरण प्रमाणपत्र में मालिकाना हक शिकायतकर्ता के नाम ही दर्ज था। वाहन वित्तीय बंधक के अधीन था, ऐसे में स्वामित्व का हस्तांतरण संभव नहीं था। आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता वाहन का वैध स्वामी है और बीमा कंपनी की ओर से दावा अस्वीकार करना सेवा में कमी है।
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