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एंबुलेंस में पांच घंटे तड़पती रही महिला, फिर किया रिपन अस्पताल में दाखिल
Mon, 10 May 2021 06:55 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, रिकांगपिओ (किन्नौर)
अमर उजाला नेटवर्क, रिकांगपिओ (किन्नौर)
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 10 May 2021 06:55 PM IST
सार
किन्नौर के विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि इस लापरवाही से लगता है कि किन्नौर के स्वास्थ्य विभाग और शिमला के अस्पतालों का कोई तालमेल नहीं है। तबीयत ज्यादा खराब होने पर 28 वर्षीय संक्रमित महिला को क्षेत्रीय अस्पताल रिकांगपिओ से रविवार को एंबुलेंस से दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल शिमला भेजा गया था।
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दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (रिपन)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिला मुख्यालय रिकांगपिओ से दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (रिपन) शिमला रेफर महिला पर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही भारी पड़ गई। करीब 12 घंटे तक कोरोना संक्रमित 28 वर्षीय महिला एंबुलेंस में तड़पती रही। पांच घंटे तक रिपन अस्पताल में महिला को दाखिल नहीं किया गया।
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किन्नौर के विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि इस लापरवाही से लगता है कि किन्नौर के स्वास्थ्य विभाग और शिमला के अस्पतालों का कोई तालमेल नहीं है। तबीयत ज्यादा खराब होने पर 28 वर्षीय संक्रमित महिला को क्षेत्रीय अस्पताल रिकांगपिओ से रविवार को एंबुलेंस से दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल शिमला भेजा गया था।
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रिकांगपिओ से 7 घंटे में महिला शिमला पहुंची। अस्पताल में 5 घंटे तक दाखिल न करने के कारण महिला एंबुलेंस में ही तड़पती रही। नेगी ने कहा कि संक्रमितों के व्यापक उपचार की किन्नौर जिले में सुविधा नहीं है। ऐसे में मरीजों को शिमला रेफर किया जाता है।
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उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से अपील की है कि जनजातीय जिले के मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर उपचार सुविधा दी जाए। उधर, उपायुक्त किन्नौर हेमराज बैरवा ने कहा कि उन्होंने मामला दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल प्रशासन से उठाया था कि जनजातीय जिले के लोगों को समय रहे दाखिला मिले, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।