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Shimla News: चेक बाउंस के मामले में दोषी की सजा बरकरार
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कोर्ट ने दिए आत्मसमर्पण के आदेश
सत्र न्यायाधीश दविंदर कुमार की अदालत का फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सत्र न्यायालय ने चेक बाउंस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट (ट्रायल कोर्ट) के दोष सिद्ध के निर्णय और सजा के आदेश को बरकरार रखा है। न्यायाधीश दविंदर कुमार की अदालत ने दोषी महेंद्र पाल को ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित सजा को भुगतने के लिए आत्मसमर्पण करने के आदेश दिए हैं।
साथ ही 13 मई को ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश होने को कहा है। 4 जून 2024 को ट्रायल कोर्ट ने दोषी महेंद्र पाल को चार महीने का कारावास और 5 लाख रुपये का मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। यह मामला साल 2015 में राजधानी शिमला के चौपाल क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता प्रताप सिंह ने मजूदरों के भुगतान के लिए महेंद्र पाल को 2,50,000 रुपये की राशि अग्रिम दी थी। इसने रकम को वापस करने का वादा किया था लेकिन जब भुगतान करने में विफल रहा तो देनदारी को चुकाने के लिए उसने 2.50 लाख रुपये का चेक जारी किया। चेक यूको बैंक नेरवा के समक्ष भुनाने के लिए प्रस्तुत किया था लेकिन 20 जुलाई 2017 को महेंद्र पाल का खाता बंद होने के कारण चेक अस्वीकृत हो गया। इसके बाद 18 सितंबर 2017 को अदालत के समक्ष केस दायर किया था। ट्रायल कोर्ट ने महेंद्र पाल को चार महीने की सजा और 5 लाख रुपये का मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। इसके बाद महेंद्र पाल ने 4 जून 2024 को ट्रायल कोर्ट के फैसले और सजा के आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती थी। अब सत्र न्यायाधीश ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ दोषी की को खारिज कर दिया है।
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सत्र न्यायाधीश दविंदर कुमार की अदालत का फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सत्र न्यायालय ने चेक बाउंस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट (ट्रायल कोर्ट) के दोष सिद्ध के निर्णय और सजा के आदेश को बरकरार रखा है। न्यायाधीश दविंदर कुमार की अदालत ने दोषी महेंद्र पाल को ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित सजा को भुगतने के लिए आत्मसमर्पण करने के आदेश दिए हैं।
साथ ही 13 मई को ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश होने को कहा है। 4 जून 2024 को ट्रायल कोर्ट ने दोषी महेंद्र पाल को चार महीने का कारावास और 5 लाख रुपये का मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। यह मामला साल 2015 में राजधानी शिमला के चौपाल क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता प्रताप सिंह ने मजूदरों के भुगतान के लिए महेंद्र पाल को 2,50,000 रुपये की राशि अग्रिम दी थी। इसने रकम को वापस करने का वादा किया था लेकिन जब भुगतान करने में विफल रहा तो देनदारी को चुकाने के लिए उसने 2.50 लाख रुपये का चेक जारी किया। चेक यूको बैंक नेरवा के समक्ष भुनाने के लिए प्रस्तुत किया था लेकिन 20 जुलाई 2017 को महेंद्र पाल का खाता बंद होने के कारण चेक अस्वीकृत हो गया। इसके बाद 18 सितंबर 2017 को अदालत के समक्ष केस दायर किया था। ट्रायल कोर्ट ने महेंद्र पाल को चार महीने की सजा और 5 लाख रुपये का मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। इसके बाद महेंद्र पाल ने 4 जून 2024 को ट्रायल कोर्ट के फैसले और सजा के आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती थी। अब सत्र न्यायाधीश ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ दोषी की को खारिज कर दिया है।
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