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Shimla News: चेक बाउंस मामले में दोषी को कारावास, 3 लाख रुपये जुर्माना
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत का फैसला
जमीन सौदे में दिए चेक हो गए थे बाउंस
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी की अपील खारिज करते हुए उसकी सजा बरकरार रखी है।
अदालत ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर-4 द्वारा सुनाई गई दो माह के साधारण कारावास और 3,00,000 रुपये जुर्माने की सजा को सही ठहराते हुए अपीलार्थी की अपील रद्द कर दी। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को 30 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। शिकायत के अनुसार शिमला निवासी शिकायतकर्ता भूपेश सिंह ने चिड़गांव निवासी बलवंत सिंह को 13 लाख रुपये में 00-01-58 हेक्टेयर जमीन बेची थी। आरोपी ने दो लाख रुपये बयाना (टोकन मनी) और नौ लाख रुपये रजिस्ट्री के समय दिए थे जबकि शेष दो लाख रुपये इंतकाल (म्यूटेशन) से पहले देना तय हुआ था। शेष राशि के भुगतान के लिए आरोपी ने 2 मार्च 2019 को दो लाख रुपये का चेक शिकायतकर्ता को सौंपा था। शिकायतकर्ता ने जब यह चेक भुगतान के लिए लगाया तो 14 मई 2019 को खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। ट्रायल कोर्ट ने 27 मार्च 2026 को आरोपी को दोषी ठहराया और सजा सुनाई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि चेक पर हस्ताक्षर आरोपी के हैं और कानूनी मांग नोटिस भी सही पते पर भेजा था। इसके साथ ही अदालत ने अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को यथावत रखा।
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जमीन सौदे में दिए चेक हो गए थे बाउंस
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी की अपील खारिज करते हुए उसकी सजा बरकरार रखी है।
अदालत ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर-4 द्वारा सुनाई गई दो माह के साधारण कारावास और 3,00,000 रुपये जुर्माने की सजा को सही ठहराते हुए अपीलार्थी की अपील रद्द कर दी। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को 30 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। शिकायत के अनुसार शिमला निवासी शिकायतकर्ता भूपेश सिंह ने चिड़गांव निवासी बलवंत सिंह को 13 लाख रुपये में 00-01-58 हेक्टेयर जमीन बेची थी। आरोपी ने दो लाख रुपये बयाना (टोकन मनी) और नौ लाख रुपये रजिस्ट्री के समय दिए थे जबकि शेष दो लाख रुपये इंतकाल (म्यूटेशन) से पहले देना तय हुआ था। शेष राशि के भुगतान के लिए आरोपी ने 2 मार्च 2019 को दो लाख रुपये का चेक शिकायतकर्ता को सौंपा था। शिकायतकर्ता ने जब यह चेक भुगतान के लिए लगाया तो 14 मई 2019 को खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। ट्रायल कोर्ट ने 27 मार्च 2026 को आरोपी को दोषी ठहराया और सजा सुनाई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि चेक पर हस्ताक्षर आरोपी के हैं और कानूनी मांग नोटिस भी सही पते पर भेजा था। इसके साथ ही अदालत ने अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को यथावत रखा।