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कोर्ट के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करने पर फंसे ऊना के दो लोग

Thu, 11 Apr 2019 12:47 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 11 Apr 2019 12:47 PM IST
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Contempt notice against Two people in court records tampering case
फाइल फोटो

कोर्ट के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ किए जाने पर ऊना के दो आरोपियों के खिलाफ हाईकोर्ट ने अवमानना नोटिस जारी किया है। उनसे पूछा है कि क्यों न उन्हें अवमानना अधिनियम के प्रावधानों के तहत दंडित किया जाए।

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न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को प्राधिकृत किया है कि वह इस प्रकरण के लिए संबंधित दंडाधिकारी के समक्ष दोनों आरोपियों के खिलाफ शिकायत दाखिल करें। 
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मामले के अनुसार अपीलकर्ताओं ने जिला न्यायाधीश ऊना द्वारा पारित 23 दिसंबर 2015 के फैसले को हाईकोर्ट के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती दी थी। इस अपील को दायर करने के लिए देरी माफी का आवेदन भी दायर किया था। आवेदन में लिखा गया था कि इस अपील को दायर करने के लिए 166 दिनों की देरी हुई जिसे माफ किया जाए और अपील को स्वीकार किया जाए।
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आवेदन में दिए तथ्यों के अनुसार जिला न्यायाधीश ऊना द्वारा 23 दिसंबर 2015 को निर्णय सुनाया गया था और अपीलार्थियों ने 26 दिसंबर 2015 को निर्णय की सत्यापित कॉपी के लिए आवेदन किया था। जिला अदालत ऊना की कॉपिंग एजेंसी ने पांच नवंबर 2016 को निर्णय की कॉपी सत्यापित की और सात नवंबर 2016 को प्रार्थी को सत्यापित कॉपी सौंपी गई।

 ऐसे में अपील को दायर करने में 166 दिनों की देरी हुई है जिसे माफ किया जाए। हाईकोर्ट ने आवेदन की प्रारंभिक सुनवाई के बाद प्रतिवादी को नोटिस जारी कर जवाब दायर करने का आदेश दिया। प्रतिवादी ने अपने जवाब में कहा कि अपीलार्थी द्वारा अदालत के समक्ष झूठा शपथ पत्र दायर किया है।

जिला अदालत के निर्णय को चुनौती दिए जाने के मकसद से अदालत के रिकॉर्ड के साथ टेंपरिंग कर 05-01-2016 का 05-11-2016 और 07-01-2016 का 07-11-2016 किया है। कोर्ट ने जिला न्यायाधीश ऊना से रिपोर्ट तलब की।

जिला न्यायाधीश ने रिपोर्ट में कहा कि जिला अदालत द्वारा 23 दिसंबर 2015 को सुनाए गए निर्णय के लिए अपीलार्थी और प्रतिवादी दोनों ने 26 दिसंबर 2015 को आवेदन किया था।

कॉपिंग एजेंसी ने इसे पांच जनवरी 2016 को सत्यापित किया और सात जनवरी 2016 को अपीलार्थी और प्रतिवादी को सौंपी गई। हाईकोर्ट ने इस प्रतिवेदन को खारिज करते हुए दोनों अपीलार्थियो  के खिलाफ सात मई 2019 के लिए अवमानना नोटिस जारी किया है।

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