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Shimla News: संजौली के समिट्री में प्रशासन के आदेश के बाद फोरलेन टनल का निर्माण बंद

Sat, 19 Sep 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Sep 2026 11:59 PM IST
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Construction of the four-lane tunnel at the Sanjauli cemetery halted following administration orders.
ग्राउंड रिपोर्ट
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एडीएम प्रोटोकॉल ज्ञान सागर नेगी की अगुवाई में टीम ने किया क्षेत्र का दौरा, लोग बोले, पहले हमारे घर बचाओ
घरों में आई दरारों के कारणों की होगी जांच

अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला के संजौली क्षेत्र के शांति विहार वार्ड के समिट्री और ढींगू बावड़ी में कई मकानों में दरारें आने के बाद कालका-शिमला फोरलेन टनल का निर्माण कार्य रोक दिया है। जिला प्रशासन ने निर्माण पर रोक लगाते हुए एनएचएआई को भवनों को सुरक्षित करने के निर्देश दिए हैं।

क्षेत्र में बने आठ मकानों में आई दरारों का जायजा लेने के लिए शनिवार दोपहर बाद एडीएम प्रोटोकॉल ज्ञान सागर नेगी की अगुवाई में टीम ने घरों का निरीक्षण किया। टीम ने मकान मालिकों और स्थानीय लोगों की शिकायतें भी सुनीं। कंपनी के प्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे थे। प्रशासन ने टनल के निर्माण कार्य का काम तत्काल प्रभाव से बंद करने, मकानों में आई दरारों के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच कराने और मकानों को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अब जांच रिपोर्ट के बाद ही टनल निर्माण कार्य शुरू करने की अनुमति मिलेगी।
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प्रशासनिक अधिकारियों के सामने लोगों का गुस्सा जमकर फूटा। लोगों ने फोरलेन टनल का निर्माण करवा रही कंपनी और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को इस नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया है। आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले स्थानीय लोगों को विश्वास में नहीं लिया गया और भवनों की सुरक्षा का कोई ध्यान नहीं रखा। लोगों ने कहा कि उनकी रातों की नींद हराम हो गई है और वह हर समय भय के साये में जीने को मजबूर हैं। रात में की गई ब्लास्टिंग के कारण ही मकानों में दरारें आई हैं। जमीन के अंदर दो समानांतर टनल का निर्माण किया जा रहा है। सर्वे में शामिल दस में से आठ मकानों के अंदर फर्श, दीवारों और डंगों में दरारें आई हैं।
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तीन सौ मकानों को खतरा
फोरलेन टनल का जहां से निर्माण किया जा रहा है, उस क्षेत्र में आने वाले ढाई से तीन सौ मकानों को खतरा है। एनएचएआई और निर्माण कंपनी को इस क्षेत्र के स्थानीय लोगों को विश्वास में लेना चाहिए, जिससे लोगों की संपत्ति का नुकसान न हो। पूरे वैज्ञानिक तरीके से और सभी सुरक्षा उपाय करने के बाद ही निर्माण कार्य आगे बढ़ना चाहिए।
-संजय चौहान, पूर्व महापौर, नगर निगम शिमला


टनल निर्माण से ही हुआ नुकसान
शांति विहार क्षेत्र के आठ घरों में दरारें आई हैं। इसका कारण भूमिगत टनल निर्माण ही है। टनल निर्माण में एनएचएआई और निर्माण कंपनी ने स्थानीय लोगों सहित जनता के नुमाइंदे होने के नाते मुझे तक विश्वास में नहीं लिया। अब जब भवन मालिकों ने एनएचएआई को शिकायत दी, तब वीडियोग्राफी, कंपन का पता लगाने और दरारों के और अधिक बढ़ने का आकलन करने के लिए उपकरण लगाने को लेकर कंपनी जागी है।
-विनीत शर्मा, पार्षद, शांति विहार


असली वजह का लगाया जाए पता
शांति विहार के जिन मकानों में दरारें आई हैं, इसकी असली वजह जानने के लिए जांच की जाए। इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही काम आगे बढ़े। हमारी उम्रभर की पूंजी मकानों में लगी है, जिस पर खतरा मंडरा रहा है। इसलिए प्रशासन हमारी और हमारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
-राजेंद्र जस्टा, निवासी शांति विहार


रातों को घरों में महसूस होती है कंपन
रात को घरों में रहने वाले लोगों को निर्माण कार्य शुरू होने पर कंपन साफ महसूस होती है। कुछ अजीब सी आवाजें भी आती हैं। आठ मकानों में जब से दरारें आई हैं, तब से हर कोई डरा हुआ है कि न जाने कब क्या हो जाए। विनाश को दावत देने वाला विकास हमें मंजूर नहीं है। सरकार, प्रशासन और एनएचएआई हमारी और हमारे घरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही निर्माण जारी रखने या न रखने पर निर्णय लें।
-पूनम, निवासी, शांति विहार सिमेट्री


टनल के एलाइनमेंट वाले क्षेत्र में हुआ नुकसान
जहां से टनल निर्माण का एलाइनमेंट है, वहीं पर घरों को नुकसान हुआ है। काम आगे बढ़ा तो नुकसान और भी हो सकता है। इससे सैकड़ों भवन मालिकों और इनमें रहने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है। क्षेत्र के आठ मकानों में आई दरारों से साफ है कि न केवल यह आठ घर, बल्कि पूरा क्षेत्र इस टनल निर्माण से खतरे में आ सकता है। प्रशासन टनल निर्माण के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम करे।
-राजेंद्र चौहान, निवासी शांति विहार


शिकायत करने पर जागी एनएचएआई और कंपनी
शांति विहार के नीचे से जा रही दो समानांतर टनल में नीचे की ओर जाने वाली एक टनल के ऊपर के एलाइनमेंट में आ रहे दस में से आठ भवनों में दरारें आई हैं। प्रशासन और एनएचएआई को शिकायत दिए जाने के बाद ही निर्माण कंपनी और एनएचएआई हरकत में आए हैं। इससे पूर्व भवनों और लोगों की सुरक्षा के लिए कोई एहतियाती कदम नहीं उठाए गए। निर्माण कंपनी ने तकनीकी तौर पर टनल निर्माण से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए। -अंशुल चौहान, निवासी शांति विहार


करोड़ों की संपत्ति पर मंडरा रहा खतरा
चार मंजिला मकान में सीढ़ियों और दीवारों में दरारें आ गई हैं, जिससे हमारी करोड़ों की संपत्ति को खतरा पैदा हो गया है। हम चार परिवार इस भवन में रहते हैं। यदि दरारें और अधिक बढ़ीं तो हमारे पास इस भवन को खाली करने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा। हमें ऐसा विकास नहीं चाहिए, जो हमें जमीन पर लाकर रख दे। तुरंत टनल का काम बंद होना चाहिए।
-सुरजीत सिंह, निवासी शांति विवार




पूरे क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वे और भूवैज्ञानिकों से निरीक्षण करवाएं
शिमला। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की कि तकनीकी विशेषज्ञों से जांच करवाकर मकानों में आई दरारों के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए। लोगों की जान और संपत्ति की कीमत पर किसी तरह का विकास मंजूर नहीं होगा। यदि जांच में भविष्य में और नुकसान की संभावना सामने आती है तो टनल के एलाइनमेंट (संरेखण) को बदला जाए। इसलिए सिर्फ दरारों वाले भवनों का निरीक्षण करना पर्याप्त नहीं है।


जहां से टनल बन रही है, पूरे क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वे और भूवैज्ञानिकों से निरीक्षण करवाया जाए। यदि निर्माण से नुकसान हुआ है तो भवन मालिकों को मुआवजा मिले और उनके भवन सुरक्षित किए जाएं। हर भवन की स्टेबिलिटी (स्थायित्व) पर भी रिपोर्ट तैयार कर स्थिति स्पष्ट की जाए कि भवनों को अब कोई नुकसान नहीं होगा और भवन सुरक्षित हैं। ऐसा विनाशकारी विकास हमें नहीं चाहिए। अब दरारों वाले घरों की वीडियोग्राफी और उपकरण लगाकर मॉनिटरिंग शुरू हुई है। यह कार्य बंद होना चाहिए। इसकी जांच कर नुकसान के कारणों का पता लगाया जाए। भवनों को कोई खतरा न हो, तभी काम हो।
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