कांस्टेबल भर्ती मामला: सभी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करेगी एसआईटी
कांस्टेबल भर्ती पेपर लीक मामले में सभी पहलुओं को बारीकी से जांचने के लिए शिमला से भी साइबर क्राइम की टीम धर्मशाला रवाना हो गई है। टीम आरोपियों के साथ उनके परिजनों के बैंक खाते खंगालेगी। साथ ही उनकी कॉल डिटेल भी निकालेगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा की सभी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की जाएगी। सरकार की ओर से गठित एसआईटी इस जांच के साथ आगे बढ़ेगी। सभी जिलों से उत्तर पुस्तिकाएं मांगी गई हैं। पुलिस को जिला कांगड़ा में ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका है। इन सभी पहलुओं को बारीकी से जांचने के लिए शिमला से भी साइबर क्राइम की टीम धर्मशाला रवाना हो गई है। टीम आरोपियों के साथ उनके परिजनों के बैंक खाते खंगालेगी। साथ ही उनकी कॉल डिटेल भी निकालेगी। पता लगाया जाएगा कि आरोपियों की किन-किन लोगों से बात होती रही है। आरोपियों और उनके परिजनों के बैंक खातों से पैसे का लेन-देन भी हुआ होगा। अब साइबर क्राइम की टीम हिमाचल के अलावा दूसरे राज्यों में भी दस्तक देगी।
संदेह में परीक्षा कराने वाले पुलिस अफसरों और अन्य की भूमिका
प्रश्नपत्र लीक मामले में पुलिस अधिकारियों और अन्य की भूमिका भी शक में दायरे में है। हिमाचल में पुलिस कांस्टेबल की परीक्षा छह अधिकारियों की देखरेख में हुई है। इनमें चार पुलिस अधिकारी और एक-एक एचपीएसईडीसी, पंचकूला टेक एमरो प्रोग्रामर शामिल हैं। भर्ती कम स्क्रीनिंग एवं मूल्यांकन कमेटी के अध्यक्ष आईपीएस अधिकारी जेपी सिंह, एस अरुण कुमार, सौम्या, राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स कारपोरेशन (एचपीएसईटीसी) के दलीप सिंह, प्रोग्रामर टेक्निकल पवन कुमार और दिवाकर शर्मा शामिल हैं।
दूसरी बार रद हुई परीक्षा को तीसरी बार भी पुलिस ही कराएगी
हिमाचल प्रदेश में पुलिस कांस्टेबल की भर्ती दो बार रद्द हो चुकी है। अब तीसरी बार भी पुलिस मुख्यालय ही करवा रहा है। वर्ष 2019-20 और 2022 में पुलिस की देखरेख में ही कांस्टेबल भर्ती की प्रक्रिया चली। दोनों बार पेपर लीक होने के चलते परीक्षा को रद्द करना पड़ा है। दो बार की गलतियों से भी सबक नहीं लिया गया। राज्य कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर से परीक्षा न करवाने के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष भी घेर रहा है।
चुनावी साल में सरकार के गले की फांस बनेंगे परीक्षा लीक मामले
चुनावी साल में परीक्षा लीक मामले जयराम सरकार के गले की फांस बनेंगे। पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा सरकार के साढ़े चार वर्ष के कार्यकाल में दूसरी बार रद्द हो गई है। जेओए भर्ती भी सवालों के घेरे में है। अन्य महकमों में भी भर्तियां अभी लंबित चल रही हैं। शिक्षा विभाग में आठ हजार मल्टी टास्क वर्करों की भर्ती अभी तक पूरी नहीं हुई है। जेबीटी भर्ती भी लटकी हुई है। लोक निर्माण विभाग विभाग में मल्टी टास्क वर्कर भर्ती के इंतजार में है। ऐसे में बेरोजगारी के मामले पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस की नई कार्यकारिणी को पदभार संभालने के अगले ही दिन शुक्रवार को सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने को बड़ा मुद्दा मिल गया है। कांग्रेस पहले से ही भर्तियों में भाई-भतीजावाद के सरकार पर आरोप लगाते आई है। अब पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा लीक मामले को लेकर दर्ज मामले और भर्ती रद्द करने को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए बयान ने कांग्रेस को इस मुद्दे पर फ्रंट फुट पर ला दिया है। आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इस बाबत प्रदेश भर में मोर्चा खोला जाएगा।
प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष प्रतिभा वीरभद्र सिंह और नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने शुक्रवार को ही शिमला में पत्रकारों से बातचीत में इसके संकेत दे दिए हैं। उधर, दिल्ली मॉडल के सहारे हिमाचल में जमीन तलाश रही आम आदमी पार्टी भी पेपर लीक मामले को लेकर मुखर हो गई है। सरकार को इस मामले पर घेरने के लिए आने वाले दिनों में दिल्ली से आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं को हिमाचल में बुलाने की तैयारी शुरू हो गई है। उधर, प्रदेश भाजपा परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करने का तर्क देकर सरकार पर लग रहे आरोपों को सिरे से नकार रही है। भाजपा नेताओं का कहना है सरकार ने पेपर लीक होने के पुख्ता सुबूत मिलते ही बड़ी कार्रवाई की है। सरकार इस तरह के मामलों को लेकर सख्त है। चुनावी साल में इस मामले को लेकर भाजपा और सरकार क्या रुख अपनाती है। इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।