कांग्रेस नेता बोले 'लक्ष्मण रेखा न लांघें राज्यपाल'
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हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत की ओर से प्रदेश के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक करने पर अपनी असहमति व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को अधिकारियों को बुलाने के बजाय संबंधित विभागों के मंत्रियों को बुलाना चाहिए था और उनसे रिपोर्ट मांगनी चाहिए थी।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुक्खू ने कहा कि राज्यपाल का संवैधानिक पद है और अधिकारियों की बैठक बुलाकर उन्हें दिशा-निर्देश देना एवं उनके कामकाज पर रिपोर्ट तलब करना इस पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। सुक्खू ने बुधवार को कहा कि विभागों को चलाने की जिम्मेवारी संबंधित मंत्रियों की होती है और राज्यपाल को मंत्रियों से ही संबंधित विभागों के कामकाज की रिपोर्ट लेनी चाहिए थी।
राज्यपाल का हस्तक्षेप करना गलत
उन्होंने कहा कि राज्यपाल की ओर से प्रदेश के शीर्ष अधिकारियों की बैठक बुलाकर कामकाज की रिपोर्ट लेना सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप करने के समान है। सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्यपाल राज्य का संवैधानिक मुखिया होने के नाते यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता कि वे लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार के विभागों के अध्यक्षों की प्रत्यक्ष तौर पर बैठक बुलाए और इस प्रकार के हस्तक्षेप देश के लोकतांत्रिक व्यवस्था में गलत मिसाल कायम करेंगे।
राज्यपाल कैबिनेट मंत्रियों को बुलाकर किसी भी मुद्दे पर या कोई शिकायत मिलने पर उसके संबंध में रिपोर्ट मांग सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को राज्यपाल आचार्य देवव्रत की नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य मुद्दों पर उनकी मंशा पर कोई संदेह नहीं है, मगर इस तरह की बैठकें लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं और राज्यपाल की ओर से उठाए गए अन्य मुद्दों पर भी प्रदेश सरकार गंभीर है और इन्हें सुलझाने के लिए प्रयासरत है।
चंद्र कुमार बोले, लक्ष्मण रेखा न लांघें राज्यपाल
राज्यपाल आचार्य देवव्रत की ओर से राजभवन में अफसरों की बैठक पर सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद चंद्र कुमार ने धर्मशाला में प्रेस वार्ता में कहा कि राज्यपाल संवैधानिक पद के दायरे को लांघकर हिमाचल में समानांतर सरकार चलाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने यहां तक कह दिया कि राज्यपाल अफसरों को धमका रहे हैं, ये सही नहीं है। उन्होंने लक्ष्मण रेखा न लांघने तक की नसीहत दे डाली। चंद्र कुमार ने कहा कि राज्यपाल को अगर सरकार के कामकाज में कोई कमी लग रही है तो वे मुख्यमंत्री से चर्चा करें या उन्हें लिखित में दें। वे अपनी बात विश्वविद्यालयों और आम जनता के बीच तो रख सकते हैं, लेकिन अफसरों को सीधे निर्देश देने का ये तरीका गलत है। यह तो चुनी हुई सरकार को डोमिनेट करने वाली बात है।
एजेंट के तौर पर काम कर रहे राज्यपाल: माकपा
कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की राज्य कमेटी ने राज्यपाल आचार्य
देवव्रत पर विधायिका को दरकिनार कर समानांतर सरकार चलाने का आरोप लगाया है।
पार्टी के राज्य सचिव डा. ओंकार शाद ने कहा राज्यपाल कैबिनेट को भी
दरकिनार कर रहे हैं। यह संविधान की प्रस्तावना का उल्लंघन है। वे अपनी
नियुक्ति के समय से मंत्रियों, अधिकारियों को अपने पास बैठक के लिए बुला
रहे हैं।
बैठकों में राज्य से जुड़े मुद्दों पर निर्णय लेकर जनता की
ओर से चुनी हुई सरकार और स्थानीय निकायों को दरकिनार कर रहे हैं। इससे
लगता है कि राज्यपाल एक विशेष विचारधारा के तहत केंद्र सरकार के एजेंट के
तौर पर काम कर रहे हैं। सीपीआई (एम) भारत के संविधान की पालना को हमेशा
कटिबद्ध रही है। कहा कि राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख हैं।
लेकिन
संविधान के दिशा-निर्देशों के अनुरूप उन्हें राज्य कैबिनेट की सलाह पर
कार्य करना है। राज्य कैबिनेट के निर्णयों पर अगर उन्हें आपत्ति है तो उसे
दोबारा विचार के लिए भेज सकते हैं, लेकिन वे अपनी नियुक्ति के बाद से ही इस
प्रक्रिया को लागू न कर मनमाने तरीके से प्रदेश के प्रशासन को चलाना चाह
रहे हैं।