विक्रमादित्य और सीएम जयराम की जुगलबंदी चर्चा में, डीओ नोट धड़ाधड़ मंजूर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से शिमला ग्रामीण के कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह की नजदीकियों की इन दिनों सियासी गलियारों में खूब चर्चा है। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह के ज्यादातर डीओ नोट को सीएम कार्यालय बगैर ना-नुकूर के मंजूर कर रहा है। इससे विक्रमादित्य अपने हलके में हर छोटे-बड़े काम को करवा रहे हैं।
विक्रमादित्य सीएम या मंत्रियों को भेजे डीओ नोट और उन पर सरकार की मंजूरी के पत्रों को अपने फेसबुक अकाउंट पर लगातार शेयर कर रहे हैं। वह चाहे रिक्त पदों को भरने की मंजूरियां हों या उनसे मुलाकात के फोटो। इन्हें लगातार सार्वजनिक कर रहे हैं। विक्रमादित्य को अन्य विधायकों से अलग स्पेशल ट्रीटमेंट की सियासी गलियारों में खासी चर्चा है। विक्रमादित्य पर सरकार की इस मेहरबानी के पीछे जयराम ठाकुर और वीरभद्र सिंह के परस्पर अच्छे संबंधों को भी देखा जा रहा है।
कांग्रेस के कद्दावर नेता वीरभद्र सिंह के निशाने पर जयराम ठाकुर कभी भी ज्यादा नहीं रहे हैं, जैसे कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल रह चुके हैं। यहां तक कि लोकसभा चुनाव से पूर्व कई कार्यक्रमों में वीरभद्र सिंह ने जयराम ठाकुर के व्यवहार की तारीफ भी की। जयराम ठाकुर भी वीरभद्र सिंह को वरिष्ठ नेता होने के नाते उनका सम्मान करने की अनेक बार बात कर चुके हैं।
शिमला ग्रामीण नहीं भुगतेगा विपक्ष में होने का खामियाजा
विक्रमादित्य सिंह ने फेसबुक पर एक पोस्ट डाली है, जिसमें लिखा है - हमारे विपक्ष में होने का खामियाजा शिमला ग्रामीण को हम भोगने नहीं देंगे। पक्ष-विपक्ष चलता रहता है। क्षेत्र हित का कार्य रुकना नहीं चाहिए। सुन्नी महाविद्यालय में रिक्त पडे़ पद के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को लिखे नोट के बाद तीन एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर के ऑर्डर करवा दिए गए हैं।
भाजपा में जाने की अफवाह को खारिज किया, बोले- आया राम गया राम नहीं
विक्रमादित्य सिंह ने फेसबुक पर अपनी एक अन्य पोस्ट में भाजपा में जाने की चर्चा को महज अफवाह करार दिया है। विक्रमादित्य सिंह बोले - कुछ लोग अफवाह फैला रहे हैं कि विक्रमादित्य सिंह ने अनुच्छेद 370 और 35 ए का समर्थन इसलिए किया है कि वह भाजपा में जा रहे हैं जो तथ्यों से परे है।
वह भूल जाते हैं कि किसी दल में होने से पहले हम भारतीय हैं और देश हित में लिए गए किसी भी फैसले का हम स्वागत करते हैं। जहां तक पार्टी की बात है, हम कांग्रेस में थे और उम्र भर रहेंगे। ‘आया राम गया राम’ की फितरत हमारे खून में नहीं है।