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क्यों हुई हार, सात घंटे चली मैराथन बैठक
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 30 May 2014 10:45 PM IST
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मोदी लहर को हार का कारण सभी मान रहे थे, मगर इसके अलावा हिमाचल में बूथों पर कुछ मंत्रियों, विधायकों, निगमों-बोर्डों के अध्यक्षों की परफार्मेंस पर शुक्रवार को फिर उंगली उठी।
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प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों की बैठक ली। यह बैठक लगभग 7 घंटे चली और सभी ब्लॉक अध्यक्षों को खुलकर बोलने का मौका दिया गया।
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जब उनसे हार के कारण पूछे तो उन्होंने फिर से राज्य सरकार और कांग्रेस संगठन के समन्वय की कमी का राग छेड़ा। इस बैठक में 60 ब्लॉक अध्यक्षों ने भाग लिया।
इसकी अध्यक्षता कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने की। इसमें कांग्रेस महासचिव हरभजन सिंह भज्जी, प्रवक्ता नरेश चौहान, संजय सिंह चौहान और सचिव अनिल गोयल भी बैठक में मौजूद थे।
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हिमाचल कांग्रेस के सभी ब्लॉक अध्यक्षों ने अपने-अपने यहां की रिपोर्ट प्रस्तुत कर कांग्रेस पार्टी की स्थिति पर विस्तार से अपनी राय रखी। इसमें लोकसभा चुनाव में हार के कारणों की समीक्षा हुई।
कांग्र्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुक्खू ने कई ब्लॉक अध्यक्षों से उनके बूथों की परफार्मेंस जाननी चाही, तो उन्होंने कांग्रेस के दिग्गजों के प्रदर्शन पर ही उंगली उठा ली। खुद की कमजोर परफार्मेंस की बात को लेकर कई बूथ अध्यक्षों ने फिर कहा कि उनकी सरकार में सुनवाई वैसी नहीं हो रही है, जैसी होनी चाहिए।
कुछ बूथ अध्यक्षों ने तो यहां तक कहा कि जो लोग कभी कांग्रेस में नहीं रहे, उनके काम हो रहे हैं और कांग्रेसियों की कोई पूछ तक नहीं। निगमों-बोर्डों के चेयरमैन बनाए गए कई नेताओं के कमजोर जनाधार पर भी सवाल उठे।
बैठक में सुक्खू ने कहा कि चुनाव में हार-जीत दो पहलू हैं। कभी जीत तो कभी हार होती है, जिससे निराश होने की जरूरत नहीं है। इससे सीख लेनी होगी। हार से संस्थाएं खत्म नहीं हो जातीं।
प्रदेशाध्यक्ष सुक्खू ने ब्लॉक अध्यक्षों को कहा कि आने वाले समय में बूथ स्तर पर कार्यकर्ता पर संगठन को विश्वास जताना होगा तथा आकलन का आधार बूथ होगा, जिस पर गंभीरता से ध्यान देना होगा।