कंडक्टर भर्ती मामले में परिवहन निगम के सात अफसर मुश्किल में
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हिमाचल में साल 2003 की तत्कालीन वीरभद्र सरकार के दौरान हुई बहुचर्चित कंडक्टर भर्ती मामले में परिवहन निगम के सात अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मामले की जांच कर रही पुलिस ने वीरवार को चार अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया। कई घंटे की पूछताछ के दौरान पुलिस को कई अहम जानकारियां हासिल हुई हैं। पुलिस अब तक मामले में करीब दो दर्जनों लोगों से पूछताछ कर चुकी है।
माना जा रहा है कि पूछताछ में मिली जानकारी से कड़ियां जोड़ने के बाद पुलिस बड़ी कार्रवाई कर सकती है। मामले की जांच कर रहे डीएसपी योगेश जोशी ने बताया कि वीरवार को मामले में चार अधिकारियों से पूछताछ की गई।
जल्द ही मामले की जांच पूरी कर दोषियों को गिरफ्तार किया जाएगा। 24 अक्तूबर, 2003 को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक में कंडक्टरों के 300 पद भरने की मंजूरी दी गई। इनमें सामान्य वर्ग के 166, ओबीसी 54, एससी 66 और एसटी के 14 पद भरे जाने थे।
इन पदों के लिए प्रदेश भर से 17 हजार 890 आवेदन आए। 20 सितंबर, 2004 को इन पदों पर 300 की जगह 365 पद भर दिए गए। 12 मई 2005 को 13 और पद भर दिए गए, लेकिन इसी बीच भर्ती विवादों के घेरे में आ गई। लंबे विवाद के बाद कोर्ट के आदेश पर शिमला पुलिस ने 14 मार्च, 2017 को तत्कालीन एमडी, डीएम समेत पांच लोगों को आरोपी बनाकर थाना सदर में एफआईआर दर्ज कर ली।
साथ ही मामले की छानबीन के लिए डीएसपी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन कर दिया। जांच टीम ने परिवहन निगम के एमडी को पत्र लिखकर मामले में पूछताछ के लिए विभिन्न डिविजन के सात अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया था। इनमें चार आरएम, एक डीएम और दो डीडीएम शामिल हैं।