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एमएमसी शिक्षकों की नौकरी पर संकट, विभाग ने सरकार को भेजा ये प्रस्ताव

Sun, 10 Mar 2019 05:00 AM IST
ashok chauhan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: ashok chauhan Updated Sun, 10 Mar 2019 05:00 AM IST
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conditional service expansion will be provide to smc teachers in himachal

सरकारी स्कूलों में नियुक्त 2600 से अधिक एसएमसी शिक्षकों की नौकरी पर संकट आ गया है। इन शिक्षकों को अब पूर्व की तरह एक साल का सेवा विस्तार नहीं मिलेगा।

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प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने एसएमसी शिक्षकों को अब सशर्त सेवा विस्तार देने का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव के तहत एक साल की जगह नियमित शिक्षकों के रिक्त पद भरने तक ही सेवा विस्तार देने की तैयारी है।
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निदेशालय ने एसएमसी शिक्षकों की जगह नियमित शिक्षक न भेजने को लेकर क्लाज दस में दी गई छूट समाप्त करने करने की तैयारी है। सरकार से मंजूरी मिलते ही प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय नई व्यवस्था लागू कर देगा।

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पीरियड आधार पर हुई थी शिक्षकों की भर्ती

conditional service expansion will be provide to smc teachers in himachal
प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय से प्रधान सचिव शिक्षा को भेजे गए प्रस्ताव में बताया गया है कि 17 जुलाई 2012 को बनाई एसएमसी पॉलिसी के तहत प्रदेश के दुर्गम और दूरदराज क्षेत्रों में पीरियड आधार पर शिक्षकों की भर्ती की थी।

साल 2013 से 2018 तक एक- एक साल का इन्हें सेवा विस्तार दिया जाता रहा। शिक्षकों की सेवाएं जारी रखने के लिए सरकार ने क्लाज दस में छूट दी। क्लाज दस के तहत एसएमसी शिक्षकों वाले स्कूलों में नियमित शिक्षकों को नहीं भेजा गया।

 

एसएमसी शिक्षकों के लिए बनें नीति : मनोज

निदेशालय ने अब स्पष्ट किया है कि 8312 रिक्त शिक्षकों के पदों में से 5039 पदों को भर दिया गया है। 3273 पदों पर भर्ती जारी है। ऐसे में सरकार से पूछा गया है कि क्या वर्तमान में नियुक्त 2600 से अधिक एसएमसी शिक्षकों को साल 2019 के लिए एक साल का सेवा विस्तार दिया जाना है या नियमित शिक्षकों की भर्ती होने तक सेवा विस्तार दिया जाए। उधर, अब एसएमसी शिक्षकों का भविष्य प्रदेश सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।

एसएमसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष मनोज रौंगटा ने कहा है कि जिन स्कूलों में नियमित शिक्षक जाने से गुरेज करते थे, वहां एसएमसी शिक्षकों ने सेवाएं दी हैं। सरकार को हमारे लिए नीति बनानी चाहिए। हजारों शिक्षकों और उनके परिवारों के हितों का सरकार ध्यान रखे। उन्होंने कहा कि इस मांग को लेकर जल्द मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मुलाकात करेंगे।

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