रद्द हो सकती है हिमाचल के नौ कांग्रेस विधायकों की सदस्यता
भारतीय निर्वाचन आयोग से हिमाचल के नौ कांग्रेस विधायकों की सदस्यता रद्द करने की शिकायत की गई है। सामाजिक कार्यकर्ता देव आशीष भट्टाचार्य ने कहा है कि हिमाचल के मुख्य संसदीय सचिवों पर भी आम आदमी पार्टी के संसदीय सचिवों की तर्ज पर कार्रवाई की जाए।
उन्होंने विधायकों को नोटिस जारी कर उन्हे प्रदेश विधानसभा सदस्य के रूप में अयोग्य करार देने की मांग की गई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ये सभी कांग्रेस विधायक भी लाभ के पदों पर तैनात हैं। हिमाचल से ताल्लुक रखने वाले नोएडा निवासी देव आशीष
भट्टाचार्य ने शिकायत में कहा कि हिमाचल के नौ कांग्रेस विधायक मुख्य संसदीय सचिव बनाए गए हैं। ये विधायक भी लाभ के पदों पर हैं। स्पीडी ट्रायल के बाद इन सभी को प्रदेश विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जाए।
नौ कांग्रेस विधायक लाभ के पदों पर तैनात
इन सभी को वेतन और भत्तों को रूप में अब तक दिया गया धन वापस जमा करने को कहा जाए। देव आशीष भट्टाचार्य ने कहा कि इस बारे में हिमाचल के मुख्यमंत्री को भी नोटिस जारी किया जाना चाहिए। वर्ष 2005 में भी इस तरह की नियुक्तियों को प्रदेश विधानसभा ने खारिज कर दिया था।
भट्टाचार्य ने कहा कि इस बारे में दिल्ली के 21 आम आदमी पार्टी विधायकों की तर्ज पर कार्रवाई की जाए। इस बारे में मुख्य निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र चौहान से भी संपर्क किया गया, मगर वे प्रतिक्रिया को उपलब्ध नहीं हुए। ये मालूम रहे कि वर्तमान में मुख्य संसदीय
सचिव ज्वाली के विधायक नीरज भारती, घुमारवीं के विधायक राजेश धर्माणी, रेणुका के विधायक विनय कुमार, सुलह के विधायक जगजीवन पाल, रामपुर के विधायक नंद लाल, जुब्बल-कोटखाई के रोहित ठाकुर, सुंदरनगर के विधायक सोहन लाल, बड़सर के विधायक इंद्रदत्त लखनपाल और करसोग के विधायक मनसा राम हैं।