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Shimla News: सिलिंडर में गैस लीक होने से घर में लगी आग, 2.50 लाख मुआवजा देने के आदेश

Fri, 09 Oct 2026 11:57 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2026 11:57 PM IST
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compensation to victums
2018 में हुआ था हादसा, झुलस गई थी बहु
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रुचि सांख्यान
शिमला। हिमाचल प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एलपीजी सिलिंडर में गैस लीक होने के कारण घर में लगी आग से हुए नुकसान के मामले में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और बीमा कंपनी की जिम्मेदारी तय की है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंद्र सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की पीठ ने जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश में संशोधन करते हुए आईओसी की अपील खारिज कर दी, जबकि वितरक हिमाचल प्रदेश सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन को मामले में पूरी तरह से दायित्व मुक्त कर दिया।
तहसील ठियोग के गांव मंझोली (घूंड) निवासी शिवी देवी के नाम पर घरेलू एलपीजी कनेक्शन था। 8 दिसंबर 2017 को सिविल सप्लाई की ठियोग गैस एजेंसी से सिलिंडर लिया गया था। 6 फरवरी 2018 को जब शिवी देवी की पुत्रवधू नीलम ने सिलिंडर में रेगुलेटर लगाया, तो अचानक गैस रिसाव हुआ और आग भड़क गई। इस हादसे में मकान के दो कमरे, रसोई, बाथरूम और शौचालय क्षतिग्रस्त हो गए और घरेलू सामान जल गया। हादसे में नीलम भी झुलस गई थी।
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जिला आयोग ने सुनाया था मुआवजा देने का फैसला
पीड़ित परिवार ने नुकसान की भरपाई न होने पर जिला उपभोक्ता आयोग शिमला में शिकायत दर्ज कराई थी। जिला आयोग ने 25 सितंबर 2025 को शिकायत स्वीकार करते हुए आईओसी, सिविल सप्लाई और आईसीआईसीआई लोम्बार्ड इंश्योरेंस कंपनी को संयुक्त रूप से 2,00,000 रुपये मुआवजा (9 प्रतिशत ब्याज सहित) और 50,000 मानसिक प्रताड़ना व मुकदमा खर्च के रूप में अदा करने का आदेश दिया था।
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राज्य उपभोक्ता आयोग ने पाया कि सिलिंडर सीलबंद हालत में दिया गया था और डिलीवरी या भंडारण के समय लीकेज का कोई सबूत नहीं था। चूंकि सिलिंडर की मैन्युफैक्चरिंग, बॉटलिंग, टेस्टिंग और सीलिंग आईओसी की ओर से की जाती है, इसलिए तकनीकी खामी या लीकेज की जिम्मेदारी कंपनी की बनती है। आईओसी केवल डीलरशिप एग्रीमेंट की शर्तों का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
इसके अलावा, आईओसी की ओर से ली गई पब्लिक लायबिलिटी पॉलिसी के तहत उपभोक्ता के घर पर सिलेंडर कनेक्ट करते समय होने वाले नुकसान की अधिकतम देयता 2,00,000 रुपये तक कवर्ड है। आयोग ने शिकायतकर्ताओं की ओर से मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग को खारिज करते हुए कहा कि सर्वेयर की 2,00,000 रुपये की रिपोर्ट सही है और आर्किटेक्ट की रिपोर्ट साक्ष्य द्वारा प्रमाणित नहीं हो सकी।

पीठ ने सिविल सप्लाई की अपील मंजूर करते हुए उसका दायित्व समाप्त कर दिया और आईओसी व बीमा कंपनी को पूर्व आदेशानुसार उपभोक्ता को मुआवजा अदा करने के निर्देश दिए हैं।
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