फोरलेन प्रभावितों को फैक्टर-2 में मुआवजा देना सरकार के लिए बना मुसीबत
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फोरलेन निर्माण को लेकर जमीन अधिग्रहण करने के मामले में लोगों को फैक्टर -2 के तहत मुआवजा देना सरकार के लिए मुसीबत बन गया है। सरकार का तर्क है कि अगर फोरलेन प्रभावितों को चार गुणा मुआवजा देने की हामी भरती है तो हिमाचल में सड़कों के निर्माण और बिजली तथा अन्य प्रोजेक्टों के लिए भी जमीन एक्वायर करने पर सरकार को चार गुणा मुआवजा देना पड़ेगा।
फोरलेन विस्थापित और प्रभावित सरकार पर चार गुणा मुआवजा देने का दबाव बना रहे हैं, लेकिन सरकार के पास यह मामला लटका पड़ा है। केंद्र सरकार प्रभावितों को फैक्टर वन (जमीन की कीमत की दोगुनी राशि) के तहत मुआवजा दे रही है।
फोरलेन प्रभावित समिति का कहना है कि केंद्र ने प्रदेश सरकार को स्पष्ट किया है कि अगर सरकार फैक्टर टू (जमीन की चार गुणा राशि) के तहत मुआवजा देने पर राजी होती है तो केंद्र यह मुआवजा देने को तैयार है।
लेकिन पेच यह है कि सरकार को फिर हिमाचल में लगाए जाने वाले प्रोजेक्टों के लिए जमीन एक्वायर करने के लिए इतनी राशि देनी पडे़गी। इसके चलते सरकार इस पर क्या करे क्या न करे की स्थिति में है। हिमाचल में शिमला-धर्मशाला, पठानकोट-मंडी, जालंधर-मंडी और परवाणू-शिमला फोरलेन का काम चल रहा है।
इसमें लोगों की जमीनें एक्वायर की गई हैं। अभी लोगों को फैक्टर वन के तहत ही राशि मुहैया कराई जा रही है। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के सचिव मदन लाल शर्मा का कहना है कि लोगों को जमीन एक्वायर करने के बाद पैसा नहीं दिया जा रहा है।
मकान तोड़े गए, रास्ते और पेयजल स्रोतों को तबाह कर दिया गया। जरूरत से ज्यादा लोगों की जमीनों का अधिग्रहण किया गया। उन्होंने जयराम सरकार से चार गुणा मुआवजा देने के प्रस्ताव पर मुहर लगाने की मांग की है।