टीसीपी पर बिल लाएगी सरकार: वीरभद्र
हिमाचल प्रदेश सरकार अवैध भवनों को वैध-अवैध घोषित करने के लिए टीसीपी अध्यादेश नहीं बल्कि बिल लाने जा रही है। इसके लिए सरकार जल्द ही एक सप्ताह के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है।
वीरवार को सचिवालय में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस दौरान अवैध निर्माण करने वालों के साथ सरकार सख्ती से पेश आएगी। ऐसे निर्माणों पर भारी जुर्माना करने की भी तैयारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत लोग अपने वाणिज्यिक और घरेलू निर्माणों को नए टीसीपी के तहत नियमित कराने की मंशा से ढांचे खड़े कर रहे हैं, लेकिन वे गलतफहमी में हैं कि सरकार उन्हें ढील देगी। नियमों की अवहेलना पर सरकार भारी जुर्माना लगाएगी।
साथ ही भवनों को नियमित भी नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अध्यादेश वापस लेने के बाद 15 दिन में किए गए अवैध निर्माण के रिकॉर्ड की वीडियो फुटेज और सेटेलाइट चित्र लिए जाएंगे।
उन्होंने माना कि एक भवन या ढांचे की निश्चित स्तर से अधिक ऊंचाई नहीं होनी चाहिए। अधिनियम में ऐसे कुछ उप धाराएं हैं, जिनके विश्लेषण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने तीन बार विधानसभा के सत्रों को बाधित किया है। विपक्ष ने सत्र में उपस्थित होने और विकास के मुद्दों पर चर्चा करने की बजाय अमर्यादित व्यवहार किया है।
चाय बागानों का उपयोग दूसरे उद्देश्य के लिए नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि लैंड सीलिंग कानून के तहत देश भर में केवल चाय बागानों को ही खरीद और बिक्री से छूट दी गई है। चाय बागानों के अधीन भूमि को किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता।
प्रदेश सरकार चाय बागानों का संरक्षित व विकसित कर कांगड़ा चाय को अन्य राज्यों के साथ प्रतिस्पर्धात्मक स्तर पर लाने की इच्छुक है। चाय बागानों के मालिकों को यह दोनों लाभ एक साथ नहीं दिए जा सकते कि एक तरफ उन्हें लैंड सीलिंग कानून के तहत छूट दी जाए। उन्होंने कहा कि चाय बागान भूमि को परिवार के भीतर हस्तांतरित किया जा सकता है, लेकिन बेचा नहीं जा सकता।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि पुलिस वायरलेस सेट गुम होने का मामला पुलिस प्रशासन की लापरवाही है। प्रदेश सरकार इसे गंभीरता से लेगी। सरकार की ओर से इसकी जांच करवाई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व अधिकारियों का व्यवहार अनुशासनहीनता है। प्रदेश सरकार उनसे बातचीत कर रही है। हमेशा विभिन्न संघों और एसोसिएशन की समस्याओं को सुनने के लिए और उनके समाधान के लिए तत्पर है। लेकिन इसके बाद भी वे आंदोलन का रास्ता अपना रहे हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी मंत्रियों को कहा है कि वे कर्मचारी संघों की समस्याओं को सुनें और उसका हल करें।