रिश्वत कांड: CBI ने कसा शिकंजा, सीएम के ओएसडी से नौ घंटे पूछताछ
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उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक तिलकराज शर्मा रिश्वत प्रकरण में सीएम के ओएसडी पीएस रघुवंशी से नौ घंटे पूछताछ हुई। रघुवंशी शिमला से सुबह 11 बजे ही सीबीआई कार्यालय चंडीगढ़ पहुंच गए थे। रात 8 बजे तक उनसे पूछताछ चली।
सीबीआई ने रघुवंशी से सभी आरोपियों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की। तिलकराज और राणा के सामने पूछताछ के दौरान रघुवंशी ने उन्हें पहचानने से इंकार कर दिया और कहा कि वह न तो पहले उनसे कभी मिला है और न ही उनका नाम सुना है।
साथ ही कहा कि उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। उसे नहीं पता कि उसका नाम कैसे सामने आया है। जांच पड़ताल के बाद संभवतया: उनकी एक-दो दिन में गिरफ्तारी हो सकती है। सीबीआई के पास उनके खिलाफ सबूत तो पुख्ता हैं, बस मामले में उनकी भूमिका को लेकर पड़ताल की जा रही है।
रिकार्डिगिं में सामने आए थे नाम
बता दें कि रघुवंशी का नाम लेकर ही तिलकराज ने सीए चंद्रशेखर से फोन पर 10 लाख रुपये देने को कहा था। तिलकराज ने कहा था कि उसे पैसे दिल्ली में सीएम के ओएसडी रघुवंशी तक पहुंचाने हैं। अगर उन्हें यकीन न हो तो वह उसकी उनसे बात करवा सकता है।
सूत्रों के अनुसार तिलकराज को 35 लाख रुपये जमा कर बिचौलिए संदीप को देने थे। संदीप को वह पैसे आगे दिल्ली निवासी सुरेश पठानिया तक पहुंचाने थे। पठानिया की दिल्ली में दुकान बताई जा रही है।
लेकिन उसका असली काम ऐसे ही हवाला के जरिए पैसे ट्रांसफर करने का बताया जा रहा है। उसका और संदीप का नाम तिलकराज और अशोक राणा से पूछताछ के दौरान सामने आया था। वहीं संदीप का नाम फोन रिकार्डिगिं में भी सामने आया था।
बिचौलिए सुरेश पठानिया का मोबाइल सीज
सीबीआई ने संदीप और पठानिया को समन भेज कार्यालय में बुलाया था। दोनों बुधवार शाम को ही सीबीआई कार्यालय पहुंच गए थे। यहां दोनों से देर रात तक जांच एजेंसी ने पूछताछ की। सुरेश पठानिया से वीरवार को भी पूछताछ की गई। फिलहाल उसका मोबाइल सीज कर उसे जाने दिया गया है। सुरेश पठानिया के दिल्ली स्थित दो अस्पतालों में जूस कॉर्नर हैं।
तिलकराज और राणा का रिमांड दो दिन बढ़ा
पांच लाख रिश्वत लेते पकड़े गए उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक तिलकराज शर्मा और उद्योगपति अशोक राणा का रिमांड दो दिन और बढ़ा दिया गया। सीबीआई ने दो दिन का रिमांड खत्म होने के बाद वीरवार को दोनों को जिला अदालत में पेश किया। यहां जांच एजेंसी ने दोनों का तीन दिन का और रिमांड मांगा।
बचाव पक्ष के विरोध और सीबीआई के सरकारी वकील की दलीलें सुनने के बाद सीजेएम ने दोनों को दो-दो दिन के रिमांड पर भेज दिया। इससे पहले सीबीआई के सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि दोनों आरोपियों ने रिमांड के दौरान डिसक्लोजर स्टेटमेंट दी है। इसमें उन्होंने माना है कि उन्हें पैसा सीएम के ओएसडी को भेजना था।
जांच में नहीं कर रहे सहयोग
इसके अलावा उन्होंने कुछ अन्य लोगों के भी नाम लिए हैं। उन लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है और दोनों आरोपियों की उनसे आमने-सामने बैठाकर बात करानी जरूरी है। वहीं बचाव पक्ष के वकील ने रिमांड का विरोध करते हुए कहा कि सीबीआई उनसे मौके से ही रिकवरी कर चुकी है और दो दिन का रिमांड पहले ही ले चुकी है।
पूछताछ, आमने-सामने बैठाकर सवाल जवाब के बावजूद सीबीआई को कुछ नहीं मिला है। ऐसे में रिमांड का कोई आधार नहीं बनता। इस पर सरकारी वकील ने बताया कि दोनों आरोपी अलग-अलग बयान दे रहे हैं और जांच में सहयोग नहीं कर रहे। इसके अलावा मामले में कुछ और लोगों के नाम सामने आए थे। उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया था। उनकी आरोपियों के सामने बैठाकर पूछताछ करना जरूरी है।