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जल विद्युत क्षमता को बढ़ावा देने को होगा नीति में बदलाव: सीएम वीरभद्र
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 01 Sep 2017 06:14 PM IST
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प्रदेश सरकार जल विद्युत क्षमता के तीव्र दोहन को उच्च प्राथमिकता दे रही है जो प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए अति महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने यह बात हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड तथा प्रदेश के विभिन्न नदी तटों के जल विद्युत निर्माताओं व अन्य हितधारकों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित सेमीनार में कही।
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आयोजन को जल विद्युत क्षेत्र के विकास के लिए एक आवश्यक पहल करार देते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में जल विद्युत क्षमता के दोहन के लिए जल विद्युत नीति में जल्द आवश्यक परिवर्तन किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्युत क्षेत्र आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण है क्योंकि अन्य सभी क्षेत्र विद्युत की उपलब्धता पर निर्भर हैं।
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प्रदेश सरकार इस तथ्य से परिचित है तथा जल विद्युत क्षेत्र को उच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है और इससे दूरदराज के क्षेत्रों में विकास सुनिश्चित होगा तथा प्रदेश के राजस्व में बढ़ोतरी का मुख्य संसाधन होगा। सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को हर संभव सहायता प्रदान करेगी जो प्रदेश की आर्थिकी का एक मुख्य संसाधन है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि जल विद्युत के उत्पादन जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को शुरू करने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2006 में अलग से अपनी जल विद्युत नीति बनाई है। इस अवसर पर केन्द्रीय जल आयोग के पूर्व अध्यक्ष एबी पांडेय ने केन्द्र तथा राज्य सरकारों द्वारा स्वीकृतियों में देरी के मामलों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने की आवश्यकता पर बल दिया।
आवंटन में पारदर्शिता सुनिश्चित बनाने के साथ- साथ परियोजनाएं आरंभ करने के लिए ठोस योजना तथा गहन जांच अन्य महत्वपूर्ण पहलू हैं। कहा कि लोगों का सक्रिय समर्थन प्राप्त किया जाना चाहिए क्योंकि आखिर में लोग ही इससे लाभान्वित होंगे।
एचपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक देवेश कुमार ने सेमिनार आयोजित करने के उद्देश्य तथा राज्य सरकार द्वारा जल विद्युत क्षेत्र के पुनरुद्धार के किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया, अतिरिक्त मुख्य सचिव तरूण श्रीधर, डा श्रीकांत बाल्दी तथा तरूण कपूर भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
एक महीने में बनेगी हिमाचल में नई ऊर्जा नीति
अतिरिक्त मुख्य सचिव तरूण श्रीधर ने कहा कि राज्य सरकार ने जल विद्युत क्षेत्र के पुन: उद्धार के लिए प्रभावी कदम उठाने के उद्देश्य से एक समिति का गठन किया है। यह समिति वर्तमान की जरूरतों और बदलावों पर काम कर रही है। सरकार ने ऊर्जा उत्पादकों की सुविधा के लिए अनेक प्रोत्साहनों की पेशकश भी की है।
उन्होंने ऊर्जा उत्पादकों से इस क्षेत्र के पुनर्जीवन के लिए सरकार को सहयोग प्रदान करने का आग्रह किया। कहा कि अभी तक जरूरत के हिसाब से नीति में संशोधन किए जाते थे लेकिन अब एक महीने के अंदर नई ऊर्जा नीति बन जाएगी जो आज के समय के हिसाब से जरूरी होगी।