हिमाचल: छूट के बाद भी निर्माण शुरू नहीं करने वाली जलविद्युत परियोजनाओं का रद्द होगा आवंटन
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि नई नीति के तहत भविष्य में मुफ्त बिजली रायल्टी के मोहलत का प्रावधान पूरी तरह समाप्त कर पूर्व में दी गई छूट को समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।
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हिमाचल प्रदेश में कई प्रकार की छूट मिलने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू करने वाली जलविद्युत परियोजनाओं को आवंटन रद्द किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने ऊर्जा विभाग को एक-एक परियोजना का ब्योरा खंगालने के बाद इनके दोबारा टेंडर करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सचिवालय में ऊर्जा विभाग के कामकाज की समीक्षा करते हुए सूबे में जलविद्युत परियोजना लगाने को अब 99 की जगह 40 साल के पट्टे पर भी जमीन देने का फैसला लिया। प्रदेश में उत्पादन कर रही परियोजनाओं में तीन प्रतिशत तक सरकार की रायल्टी बढ़ाने का निर्णय भी लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ाने के उद्देश्य से नई ऊर्जा नीति बनाने पर विचार कर रही है।
नई नीति के तहत भविष्य में मुफ्त बिजली रायल्टी में मोहलत का प्रावधान पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। पूर्व में दी गई छूट को समाप्त करने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को पहले 12 वर्ष तक 15 फीसदी, अगले 18 वर्ष तक 20 फीसदी और इससे अगले 10 वर्ष तक 30 फीसदी हिस्सा देने का प्रावधान होगा। अभी तक पहले 12 वर्ष के लिए 12 फीसदी, अगले 18 वर्ष के लिए 18 फीसदी और इससे अगले 10 वर्ष के लिए 30 फीसदी का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि भविष्य की जलविद्युत परियोजनाओं के लिए सरकार की नीति के अनुसार जमीन 40 वर्ष के पट्टे पर दी जाएगी। उन्होंने जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया को सरल बनाने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 11149.50 मेगावॉट क्षमता की 172 जलविद्युत परियोजनाएं कार्यशील हो चुकी हैं, जबकि 2454 मेगावाट क्षमता की 58 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।
राज्य सरकार के विभिन्न उपक्रमों के माध्यम से निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो और ऊर्जा विभाग को इनकी निगरानी के लिए तंत्र विकसित करना चाहिए। ऊर्जा निदेशालय को सुदृढ़ किया जाएगा और विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का भी इस्तेमाल किया जाएगा। प्रदेश के राजस्व अर्जन में किसी भी तरह के नुकसान से समझौता नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष 500 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजनाएं शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और विभाग को इस दिशा में गंभीरता से काम करना चाहिए। बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार रामसुभग सिंह, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, सचिव ऊर्जा राजीव शर्मा, मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल शर्मा, निदेशक ऊर्जा हरिकेश मीणा भी मौजूद रहे।
बीबीएमबी, शानन बिजली परियोजना में बढ़ाएंगे हिस्सेदारी
बीबीएमबी और शानन बिजली परियोजना सहित जिन परियोजनाओं की लागत वसूल हो गई है, उनमें राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाने के प्रयास करने का भी बैठक में फैसला लिया गया। इसके लिए केंद्र सरकार और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों से पत्राचार करने के मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने जल विद्युत परियोजनाओं की स्थापना के लिए पूर्व-कार्यान्वयन और कार्यान्वयन समझौतों पर हस्ताक्षर नहीं करने के लिए केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को गंभीरता से लिया और ऊर्जा विभाग को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
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