Hamirpur News: सीएम सुक्खू बोले- प्रधानमंत्री मोदी को दिया हिमाचल आने का न्योता
हमीरपुर प्रवास के दौरान पत्रकारों से बातचीत में सुक्खू ने कहा कि हमें अभी सत्ता संभाले 42 दिन हुए हैं। प्रदेश की आर्थिक स्थिति काफी खराब है। पूर्व सरकार प्रदेश पर 75,000 करोड़ का कर्ज छोड़ गई है।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सार्थक चर्चा हुई है। वह हिमाचल के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं। प्रधानमंत्री से पहली और शिष्टाचार मुलाकात हुई है। उन्हें हिमाचल आने का न्योता दिया है। हमीरपुर प्रवास के दौरान पत्रकारों से बातचीत में सुक्खू ने कहा कि हमें अभी सत्ता संभाले 42 दिन हुए हैं। प्रदेश की आर्थिक स्थिति काफी खराब है। पूर्व सरकार प्रदेश पर 75,000 करोड़ का कर्ज छोड़ गई है। जो कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं और पेंशनभोगी हैं, उनका 5,500 करोड़ तो छठे वेतन आयोग के लागू होने के बाद कर्मचारियों का एरियर देय है।
4,500 करोड़ वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों का बकाया है। डीए किस्त के तौर पर 992 करोड़ का एरियर बनता है। यह वही अधिकारी हैं, जो पूर्व में पुरानी पेंशन स्कीम के लिए इनकार कर रहे थे। वर्तमान सरकार ने उनसे चर्चा कर पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने का निर्णय लिया। प्रदेश में एनपीएस के एक लाख 36 हजार कर्मचारी हैं, जिन्हें पुरानी पेंशन मिलनी है। उन्होंने जनता से आग्रह किया है कि हमें समय दीजिए। अर्थव्यवस्था को अगर पटरी पर लाना है तो करीब चार साल लगेंगे। अपने फैसलों से जल्दी अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे।
हिमाचल को ग्रीन और विकसित राज्य के रूप में उभारेंगे। आने वाले समय में कड़े फैसले लिए जाएंगे। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सहारे प्रदेश में 600 से ज्यादा संस्थान खोल दिए। अगर कार्यालय बंद न किए होते तो पांच हजार करोड़ का और कर्ज होता। कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर के कामकाज को निलंबित करने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी जांच चल रही है। विजिलेंस की रिपोर्ट चौंकाने वाली हैं। जांच के बाद ही हम कुछ कह सकते हैं। मंत्रिमंडल विस्तार पर सुक्खू ने कहा कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।
सीमेंट विवाद पर जल्द कोई निर्णय लेंगे : सीएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमेंट कारखाने के मालिक और ट्रक ऑपरेटरों के बीच आपसी सहमति बनती है तो ठीक है। उद्योग मंत्री ने बातचीत आगे बढ़ाई थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। अब जल्द कोई निर्णय लेंगे। ट्रक ऑपरेटरों की आजीविका चलती रहनी चाहिए। यह वही सीमेंट कंपनियां हैं, जो पूर्व में प्रति किलोमीटर 11.41 रुपये की दर से किराया देती थीं। अब किराया कम करने की बात कर रही हैं।