योजनाएं लागू न होने से मुख्यमंत्री तल्ख, अफसरों की लगाई क्लास
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धर्मशाला रैली के बाद सीएम जयराम ठाकुर एकाएक कडे़ तेवरों में आ गए हैं। सामने लोकसभा चुनाव देख उन्होंने अपना रुख बदल दिया है। अपनी सरकार के एक साल के जश्न में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शाबाशी पाने के बाद रविवार दोपहर को छुट्टी का दिन होने के बावजूद उन्होंने पीटरहॉफ में अचानक एक गोपनीय बैठक बुलाई।
इसमें अपने दो मंत्रियोें विपिन सिंह परमार और बिक्रम सिंह ठाकुर को भी बुला लिया। यहां भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती और संगठन के अन्य नेता भी पहुंचे। मुख्य सचिव बीके अग्रवाल और अन्य प्रमुख अधिकारी पहले ही बुला लिए गए थे।
सामने लोकसभा चुनाव की चुनौती होने पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर काफी सख्त हैं। करीब 12 बजे शुरू हुई बैठक का पहला दौर करीब पांच बजे खत्म हुआ। इसके बाद देर रात तक दूसरा दौर चला।
सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री ने अपने पहले बजट की कई घोषणाओं को धरातल पर लागू न करने में नाकाम रही अफसरशाही से असंतोष जताया, वहीं आगामी वित्तीय वर्ष 2019-20 के वार्षिक बजट अनुमानों को गंभीरता से तैयार करने के आदेश दिए।
उन्होंने भाजपा के स्वर्णिम दृष्टिपत्र के बिंदुओं पर भी चर्चा की। उन्होंने दोनों युवा मंत्रियों स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार और उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर से भी दोनों अहम महकमों का प्रमुख होने के नाते कई सुझाव लिए।
उनके मंत्रिमंडल सदस्यों की कार्यशैली अधिक चुस्त-दुरुस्त करने पर भी चर्चा हुई। सूत्रों ने बताया कि बंद कमरे में हुई इस बैठक को गोपनीय रखने को कहा गया। मंत्री, अधिकारी तक इस बैठक की अंदरूनी बातों पर कुछ कहने से कतराते रहे।
शांता, धूमल, नड्डा से ज्यादा तवज्जो दी मोदी ने
धर्मशाला में मंच पर प्रदेश भाजपा के दिग्गजों पूर्व सीएम शांता कुमार, प्रेमकुमार धूमल, केंद्रीय मंत्री जगतप्रकाश नड्डा से ज्यादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर ही था। वह उनकी सरकार की उपलब्धियों पर लगातार शाबाशी देते रहे। एक तरह से मोदी ने इस तरह से जयराम ठाकुर को पूरी तरह से फ्री हैंड दिया होने का भी संदेश दिया।