बचपन में सोचता था कि अखबार मेरा भी नाम छापे, पर नहीं छपा: जयराम
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा- बचपन में हम भी ऐसा सोचते थे कि कुछ अच्छा करें। अखबार में हमारा भी नाम आए। मेरा भी अखबार नाम छापे। लेकिन उस तरह की स्थिति नहीं आ पाई। अब जाकर हमारा नाम छपता है। मुझे इस बात का संतोष है कि जो कभी मैं सोचता था कि मैं पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बनूं।
मेरी बेटियों ने उस काम को पूरा किया। स्वाभाविक रूप से उसमें मेरा योगदान नहीं है। सीएम ने अपनी धर्मपत्नी डॉ. साधना ठाकुर की ओर इशारा कर कहा- इसमें मां का योगदान रहता है।
लगभग सभी घरों की यही परिस्थितियां हैं। सीएम ने आगे कहा- मैं बच्चों से ये जरूर कहना चाहता हूं कि जिंदगी में कितने भी बड़े हो जाओ, मगर अपनी कामयाबी में अपने बच्चों का नाम कभी न भूलें। इसके अलावा जिस भी व्यक्ति ने आगे बढ़ने के लिए आपको प्रेरित किया हो। वह चाहे शिक्षक हो या कोई और हो। उनका बहुत बड़ा योगदान रहता है।
बेटियों ने बहुत बड़ी तादाद में पाया है मुकाम
कहीं भी पहुंचे अपने शिक्षक को भी न भूलें। मेरा बच्चों से निवेदन है कि निश्चित रूप से आदमी जब आगे बढ़ता है तो वह बहुत सी चीजें पीछे छोड़ जाता है। सीएम बोले - मैं इस बात को महसूस करता हूं कि जो अभिभावक यहां बैठे हैं, ये मुकाम हासिल किया है।
यह उनके अभिभावकों के सहयोग से ही संभव हो पाया है। मां-बाप अगर बच्चों को डांटते भी हैं तो उसके पीछे भी प्यार होता है। जाग-जागकर बच्चों को प्रेरित किया जाता है। उसके पीछे एक लक्ष्य होता है। एक भावना होती है कि हमारा बच्चा आगे बढे़, अच्छा इंसान बने।
जयराम ठाकुर बोले - मैं सभी बेटियों को भी बधाई देता हूं। मैं यहां देख रहा था कि चाहे दसवीं की परीक्षा है या प्लस टू की है। चाहे एमबीबीएस के लिए तैयारियां की हो। बहुत बड़ी तादाद में बेटियों ने मुकाम पाया है।
परिस्थिति ऐसी आ रही थी कि बेटियों की कतार में कहीं-कहीं बेटे भी थे। वे भी बढ़ें। बेटियां हर क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ती जा रही हैं। ये हमारे लिए बड़ी खुशी की बात है।