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वाकआउट की गुगली पर फ्रंटफुट पर खेले सीएम जयराम

Sat, 17 Mar 2018 01:16 PM IST
अरुणेश पठानिया, अमर उजाला, शिमला
अरुणेश पठानिया, अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 17 Mar 2018 01:16 PM IST
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cm jairam thakur and himachal assembly budget session

बजट सत्र की पहली पारी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के जवाब के साथ खत्म हो गई है। विपक्ष के बजट पर उठाए सवालों को विराम देने के लिए जयराम का शे‘र ‘नजर का इलाज तो संभव है, पर नजरिये का नहीं’ सदन के सियासी हालात पर फिट बैठता दिखा। विपक्ष के नजरिये पर सवाल खड़ा कर खुद को ‘हिसाब’ में कमजोर बता अपना डिफेंस भी किया।

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विपक्ष के तीखे तेवरों से सत्ता पक्ष में दिखी हड़बड़ाहट अब कम हो गई है। नौ दिन चले सत्र में कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने पांच बार वाकआउट की गुगली फेंक ट्रेजरी बेंच को चौंकाया। कमजोर संख्या बल के बावजूद सदन में विपक्ष ने सरकार को हर फ्रंट पर घेरा। छह मार्च को बजट सत्र की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में हुई।
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प्रदेश के मुजारा कानून की धारा 118 पर जयराम सरकार को कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने अपने सदस्यों के साथ घेरा। विपक्ष के वाकआउट की पहली फिरकी में सरकार फंसती दिखी। इसके बाद धारा 118 के बाद तबादला उद्योग के बाउंसर से सरकार की मुश्किलें और बढ़ीं। सरकार और विपक्ष के बीच तल्खी बढ़ते देख विस अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल मैच रेफरी की भूमिका में आए। 

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दोनों ओर के नेताओं को बुलाकर लाइन लेंथ सही रखने की सलाह दी। इसका असर भी दिखा। इसके बाद हंगामा तो कई बार हुआ, लेकिन विपक्ष सदन की कार्यवाही का हिस्सा बना रहा। बजट पेश होने के बाद समीकरण बदलते दिखे। सरकार ने पलटवार कर विपक्ष को न सिर्फ पुराने फाइलें खोलने को चेताया, बल्कि प्रश्नकाल में भी कई पुराने मामलों पर पूर्व मंत्रियों के खिलाफ जांच की बात से सरकार ने सदन में लय पकड़ ली।

चर्चा के आखिरी दिन मुख्यमंत्री ने बजट पर चर्चा में अपना पक्ष रखते हुए विपक्ष के धैर्य की परीक्षा ली। खुद को हिसाब का कमजोर छात्र बताकर यह जताते दिखे कि अभी यह शुरुआत है। भले ही वे हिसाब में कमजोर मान रहे हों, लेकिन उनमें ‘सियासी केमिस्ट्री’ की खूब समझ दिखी। चर्चा में राहुल गांधी की रैली में एचआरटीसी बसों के 75 लाख खर्चे का रसायन डाल विपक्ष को वाकआउट के लिए मजबूर किया। 

सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों के निशाने पर रहे मंत्री
विपक्ष के आरोप-प्रत्यारोप से अधिक सरकार को अपने कुछ विधायकों के तीखे तेवर झेलने पड़े। कमजोर होमवर्क वाले कुछ मंत्रियों को विपक्ष से अधिक अपने विधायकों ने परेशान किया। नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया के फील्डवर्क के आगे कुछ मंत्री सरेंडर के मूड में दिखे। भटियात से विक्रम जरियाल ने भी कुछ मुद्दों पर सरकार को लाजवाब किया। 

अगले नौ दिन हंगामेदार रहने के आसार 
बजट सत्र की अगली पारी 26 मार्च से 5 अप्रैल तक चलेगी। इन नौ दिनों में कई विपक्ष बजट कटौती प्रस्ताव से लेकर सदन में नए मुद्दे लाने की तैयारी करेगा। अगले सत्र में विपक्ष अधिक हंगामेदार बनाने की कोशिश कर सकता है। दूसरी तरफ, जयराम सरकार के लिए बजट चर्चा में उठे वित्तीय प्रबंधन, रोजगार सृजन और चुनावी घोषणाओं की बजट में अनदेखी के आरोपों का ठोस जवाब लेकर आना होगा।

पूर्व सरकार के फैसलों पर ही बजट सत्र में गरमाता रहा सदन

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छह मार्च से शुरू हुए विधानसभा बजट सत्र से लेकर अब तक सदन के भीतर और बाहर पूर्व सरकार के फैसले पलटने के ही इर्द-गिर्द ही सियासत घूमी। प्रश्नकाल में भले ही जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रश्न आए, इन पर न तो सत्ता और न ही विपक्ष की ओर से कोई बड़ी बहस हुई है।

सदन में जो भी हंगामा हुआ, उसकी वजह पुराने फैसले पलटने या फिर आपसी मतभेद ही दिखे। सत्ता पक्ष और विपक्ष में एक-दूसरे को घेरने के सियासी अखाड़े में बजट घोषणाओं को छोड़ दिया जाए तो जनहित के मुद्दे गौण रह गए। हालांकि, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जनता के हितों की रक्षा करते हुए बजट पेश किया है।

इसमें हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए कुछ न कुछ दिया है, लेकिन इसमें भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक हुई है। पूर्व कांग्रेस सरकार ने बीते एक महीने में जो भी योजनाएं लागू की हैं, उनमें कई योजनाओं पर भाजपा सरकार ने जांच बैठाने की बात कही है। इसमें चाहे बस खरीद का मामला हो, भर्ती या फिर पॉलीहाउस में सब्सिडी का मामला हो। स्कूल और कॉलेज को बंद करने आदि मामले भी शामिल हैं। 

इशारे करने पर बैठ जाता विपक्ष
शुक्रवार को सदन में जब शिक्षण संस्थान को बंद करने संबंधित प्रश्न पर चर्चा हो रही थी, उस समय विपक्ष काफी आक्रामक नजर आया, लेकिन सत्ता पक्ष की ओर से एक वरिष्ठ मंत्री ने जब इशारा किया तो विपक्ष के सदस्य अपनी सीट पर बैठ गए। एक वरिष्ठ मंत्री ने पहले घड़ी की ओर देखा और हंसते हुए पांचों उंगलियां खड़ी कर दीं।

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