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Himachal: गांव-गांव तक स्कूल पहुंचाने वाले हिमाचल में खाली हो रहीं कक्षाएं, यू-डायस प्लस रिपोर्ट में खुलासा

Fri, 10 Jul 2026 05:10 AM IST
Krishan Singh अनिमेष कौशल, शिमला।
अनिमेष कौशल, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 10 Jul 2026 05:10 AM IST
सार

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यू-डाइस प्लस 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में स्कूल तो पर्याप्त हैं, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या लगातार सिमट रही है। स्थिति यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर जहां एक स्कूल में औसतन 169 विद्यार्थी हैं, वहीं हिमाचल में यह संख्या महज 72 है। 

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Classrooms emptying out in Himachal a state that took schools to every village—with an average of just 72 stud
स्कूलों में कक्षाएं खाली, यू-डायस प्लस रिपोर्ट में खुलासा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कभी हिमाचल प्रदेश की पहचान गांव-गांव तक स्कूल पहुंचाने वाले राज्य के रूप में होती थी। आज वही मॉडल नई चुनौती से जूझ रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यू-डाइस प्लस 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में स्कूल तो पर्याप्त हैं, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या लगातार सिमट रही है। स्थिति यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर जहां एक स्कूल में औसतन 169 विद्यार्थी हैं, वहीं हिमाचल में यह संख्या महज 72 है। केवल लद्दाख और मिजोरम जैसे कुछ छोटे पहाड़ी राज्यों में ही इससे कम छात्र संख्या दर्ज की गई है।

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आधे स्कूल ऐसे हैं, जहां 30 से भी कम छात्र पढ़ रहे
प्रदेश में करीब आधे स्कूल ऐसे हैं, जहां 30 से भी कम छात्र पढ़ रहे हैं। रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि अब चुनौती नए स्कूल खोलने की नहीं, बल्कि खाली होती कक्षाओं के बीच शिक्षा संसाधनों के बेहतर उपयोग की है। रिपोर्ट से साफ है कि हिमाचल में स्कूलों का बुनियादी ढांचा छात्रों की संख्या की तुलना में अधिक है और संसाधनों के अनुकूलन की जरूरत है। रिपोर्ट ने इसे संसाधनों के अनुकूलन से जुड़ी चुनौती बताया है। प्रदेश में लगातार घटती जन्मदर, ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन, छोटे परिवारों का बढ़ता चलन और निजी स्कूलों की ओर रुझान ने सरकारी स्कूलों में नामांकन को प्रभावित किया है।

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सुविधाओं में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल
- छात्र संख्या कम होने के बावजूद हिमाचल ने शिक्षा के बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रदेश के 16,976 स्कूलों में कंप्यूटर सुविधा उपलब्ध है, जबकि 16,709 स्कूलों में शिक्षण कार्य के लिए कार्यशील कंप्यूटर हैं। 14,522 स्कूल इंटरनेट से जुड़े हैं। यानी डिजिटल शिक्षा के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा तेजी से मजबूत हुआ है।

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नामांकन में मजबूत, संख्या में कमजोर
रिपोर्ट का दूसरा पक्ष हिमाचल के लिए राहत भरा है। माध्यमिक स्तर पर प्रदेश की सकल नामांकन दर राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर है। इसका मतलब है कि जो बच्चे स्कूलों में नामांकित हैं, वे बड़ी संख्या में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े हुए हैं। यानी चुनौती स्कूल तक पहुंच की नहीं, बल्कि घटती छात्र संख्या और संसाधनों के संतुलित उपयोग की है।

शिक्षक-छात्र अनुपात देश में सबसे बेहतर
प्रदेश में शिक्षक-छात्र अनुपात देश के सर्वश्रेष्ठ राज्यों में शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल में 17,064 स्कूलों में 14.10 लाख छात्र और 1.03 लाख शिक्षक हैं। प्रदेश का प्यूपिल-टीचर रेशियो (पीटीआर) 14:1 है, जबकि राष्ट्रीय औसत 24:1 है। इसका अर्थ है कि हिमाचल में छात्रों की तुलना में शिक्षकों की उपलब्धता देश के अधिकांश राज्यों से बेहतर है। हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि प्रदेश में स्कूलों का बड़ा हिस्सा कम नामांकन से जूझ रहा है। 13.3 फीसदी स्कूलों में 10 से कम विद्यार्थी हैं। 20.9 फीसदी स्कूलों में 11 से 20 विद्यार्थी हैं। 14.5 फीसदी स्कूलों में 21 से 30 विद्यार्थी हैं। करीब 49 प्रतिशत स्कूलों में 30 से कम छात्र पढ़ रहे हैं।

शून्य नामांकन वाला कोई स्कूल नहीं
हिमाचल में 3,128 एकल शिक्षक स्कूल भी हैं, जबकि ऐसे स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 47,579 है। रिपोर्ट में हिमाचल के लिए सकारात्मक संकेत यह भी है कि प्रदेश में शून्य नामांकन वाला एक भी स्कूल नहीं है। कई राज्यों में ऐसे स्कूल दर्ज किए गए हैं, लेकिन हिमाचल इस समस्या से मुक्त रहा।

शिक्षा संसाधनों के बेहतर उपयोग पर दे रहे जोर : रोहित

 चुनौती स्कूलों की संख्या नहीं, बल्कि घटती छात्र संख्या के बीच शिक्षा संसाधनों के बेहतर उपयोग की है। हिमाचल गुणवत्ता आधारित शिक्षा और डिजिटल बुनियादी ढांचे को और मजबूत करेगा। सरकार लगातार इन प्रयासों में लगी है। सकारात्मक परिणाम भी अब सामने आने लगे हैं।- रोहित ठाकुर, शिक्षा मंत्री, हिमाचल प्रदेश सरकार

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