सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र से क्लास टेस्ट अनिवार्य
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नए शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में क्लास टेस्ट लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इन आदेशों के तहत हर पंद्रह दिनों बाद बच्चों का ज्ञान जांचा जाएगा। विद्यार्थियों की कमियों का टीचर डायरी में रिकॉर्ड रखा जाएगा। अभिभावकों को भी क्लास टेस्ट की रिपोर्ट भेजी जाएगी। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले उच्च शिक्षा निदेशालय ने वीरवार को सभी जिला उपनिदेशकों और स्कूल प्रिंसिपलों को गाइडलाइन जारी कर दी है।
उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि भाषा संबंधित ज्ञान को जांचने के लिए विद्यार्थियों का अक्षर ज्ञान, सरल वाक्य प्रयोग, पठन-पाठन, कहानी लेखन की क्षमता को अध्यापकों की ओर से जांचा जाएगा। स्कूलों में विद्यार्थियों के समूह बनाकर विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाएगी। बेहतर प्रदर्शन करने वालेे समूह के विद्यार्थियों के नाम कक्षा में सूचना पट्ट में लिखे जाएंगे।
सत्र के आरंभ से ही विद्यार्थियों को अपना लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। शिक्षक भी लक्ष्य तय करेंगे। परीक्षाओं से पहले शिक्षक ऐसे विद्यार्थियों को चिन्हित करेंगे जो पढ़ाई में कमजोर हैं। इन विद्यार्थियों के अभिभावकों के साथ मिलकर विद्यार्थियों में सुधार लाने के प्रयास किए जाएंगे। विषय के अध्ययन के साथ-साथ प्रयोगात्मक कार्य भी करवाए जाएंगे।
अब प्रार्थना सभा के दौरान ही मनाए जाएंगे महत्वपूर्ण दिवस
सरकारी स्कूलों में अब प्रार्थना सभा के दौरान ही महत्वपूर्ण दिवस मनाए जाएंगे। स्कूलों में दिन भर पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए यह नया फैसला लिया गया है। अब प्रार्थना सभा में केवल एक घंटे के दौरान ही दिवस मनाए जाएंगे।
आठवीं तक स्कूलों को भी बोर्ड देगा मान्यता
प्रदेश भर में चल रहे निजी स्कूलों को प्रारंभिक शिक्षा विभाग और स्कूल शिक्षा बोर्ड से अलग-अलग मान्यता लेने का झंझट खत्म करने की कवायद शिक्षा बोर्ड ने शुरू की है। वहीं छठी से दसवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए सरकारी स्कूलों के साथ निजी स्कूलों के अध्यापकों की भी राय ली जाएगी। स्कूल शिक्षा बोर्ड में वीरवार को प्रदेश के निजी स्कूलों प्रबंधकों के साथ बोर्ड अध्यक्ष डॉ सुरेश कुमार सोनी ने बैठक की।
बैठक में आठवीं तक के स्कूलों को भी बोर्ड से संबद्घता देने को लेकर चर्चा हुई। बैठक में बोर्ड से संबद्धता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थान संघ ने प्रत्येक वर्ष नवीनीकरण, कक्षा स्तरोन्नत एवं नई संबद्धता प्राप्त करने को आवेदन करते समय निर्धारित दस्तावेजों के साथ नवीनतम फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र सहित अन्य प्रमाण पत्र के बारे भी चर्चा की।
अध्यक्ष ने कहा कि निजी स्कूलों की संबद्घता में बदलाव को लेकर मंथन किया जाएगा। उन्होंने निजी स्कूल प्रतिनिधियों से एनसीईआरटी की पुस्तकें ही स्कूलों में पढ़ाने का आह्वान किया। इसके लिए शैक्षणि सत्र के शुरू में ही स्कूलों को एनसीईआरटी की पुस्तकें प्रदान कर दी जाएंगी। बैठक में स्कूल शिक्षा बोर्ड सचिव डॉ हरीश गज्जू मुख्य रूप से मौजूद रहे।