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सैन्य हथियारों के कारखानों को बेचना बंद करे सरकार : सीटू
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शिमला में उपायुक्त कार्यालय के बाहर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करते सीटू कार्यकर्ता।
- फोटो : SHIMLA CITY
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सीटू ने डीसी ऑफिस के बाहर किया प्रदर्शन, डिफेंस कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सीटू के अखिल भारतीय आह्वान पर शुक्रवार को सीटू राज्य कमेटी ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सीटू ने केंद्र से सैन्य हथियारों के कारखानों को बेचने और कर्मचारी विरोधी आवश्यक रक्षा सेवा अधिनियम निरस्त करने की मांग उठाई।
सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों विशेष तौर पर आयुद्ध कारखानों के रक्षा उत्पादन के धड़ाधड़ निजीकरण के खिलाफ और डिफेंस कर्मचारियों के साथ एकजुटता प्रकट करने के लिए प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किए। इस दौरान जिलाधीशों के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति को डिफेंस कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपे।
सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि केंद्र की मोदी सरकार निगमीकरण की प्रक्रिया के जरिये आयुद्ध कारखानों के धड़ाधड़ निजीकरण की ओर बढ़ रही है। यह देश की आंतरिक और बाह्य दोनों तरह की सुरक्षा के दृष्टिकोण से खतरनाक कदम है। इससे कर्मचारियों के भविष्य पर भी गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़े हो रहे हैं। यह कदम जहां एक तरफ देश विरोधी है वहीं दूसरी ओर कर्मचारी विरोधी भी है। यह सब केवल और केवल पूंजीपतियों की मुनाफाखोरी को बढ़ाने के दृष्टिकोण से हो रहा है।
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सरकार का यह कदम रक्षा क्षेत्र की कर्मचारी फेडरेशनों को अक्तूबर 2020 में केंद्र सरकार द्वारा दिए आश्वासन के खिलाफ है। कहा कि जब केंद्र सरकार की मनमानी के खिलाफ देश की पांच डिफेंस इंप्लायज फेडरेशनों ने हड़ताल का आह्वान किया तो आंदोलन को कुचलने के लिए सरकार ने बेहद खतरनाक आवश्यक रक्षा सेवा अधिनियम के जरिये हड़ताल और लोकतांत्रिक प्रणाली से होने वाले सभी तरह के प्रदर्शनों को प्रतिबंधित करने का फरमान जारी कर दिया। इस से न केवल रक्षा उत्पादन क्षेत्र ही प्रभावित होगा अपितु इसके पूर्ण ट्रेड यूनियन आंदोलन के लिए गंभीर परिणाम होंगे। कर्मचारी और ट्रेड यूनियन विरोधी आवश्यक रक्षा सेवा अधिनियम को तत्काल निरस्त किया जा सके। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और विशेष तौर पर आयुद्ध कारखानों के रक्षा उत्पादन के धड़ाधड़ निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सीटू के अखिल भारतीय आह्वान पर शुक्रवार को सीटू राज्य कमेटी ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सीटू ने केंद्र से सैन्य हथियारों के कारखानों को बेचने और कर्मचारी विरोधी आवश्यक रक्षा सेवा अधिनियम निरस्त करने की मांग उठाई।
सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों विशेष तौर पर आयुद्ध कारखानों के रक्षा उत्पादन के धड़ाधड़ निजीकरण के खिलाफ और डिफेंस कर्मचारियों के साथ एकजुटता प्रकट करने के लिए प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किए। इस दौरान जिलाधीशों के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति को डिफेंस कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपे।
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सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि केंद्र की मोदी सरकार निगमीकरण की प्रक्रिया के जरिये आयुद्ध कारखानों के धड़ाधड़ निजीकरण की ओर बढ़ रही है। यह देश की आंतरिक और बाह्य दोनों तरह की सुरक्षा के दृष्टिकोण से खतरनाक कदम है। इससे कर्मचारियों के भविष्य पर भी गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़े हो रहे हैं। यह कदम जहां एक तरफ देश विरोधी है वहीं दूसरी ओर कर्मचारी विरोधी भी है। यह सब केवल और केवल पूंजीपतियों की मुनाफाखोरी को बढ़ाने के दृष्टिकोण से हो रहा है।
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सरकार का यह कदम रक्षा क्षेत्र की कर्मचारी फेडरेशनों को अक्तूबर 2020 में केंद्र सरकार द्वारा दिए आश्वासन के खिलाफ है। कहा कि जब केंद्र सरकार की मनमानी के खिलाफ देश की पांच डिफेंस इंप्लायज फेडरेशनों ने हड़ताल का आह्वान किया तो आंदोलन को कुचलने के लिए सरकार ने बेहद खतरनाक आवश्यक रक्षा सेवा अधिनियम के जरिये हड़ताल और लोकतांत्रिक प्रणाली से होने वाले सभी तरह के प्रदर्शनों को प्रतिबंधित करने का फरमान जारी कर दिया। इस से न केवल रक्षा उत्पादन क्षेत्र ही प्रभावित होगा अपितु इसके पूर्ण ट्रेड यूनियन आंदोलन के लिए गंभीर परिणाम होंगे। कर्मचारी और ट्रेड यूनियन विरोधी आवश्यक रक्षा सेवा अधिनियम को तत्काल निरस्त किया जा सके। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और विशेष तौर पर आयुद्ध कारखानों के रक्षा उत्पादन के धड़ाधड़ निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की।