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शक्तियां अर्जित करने 20 साल में एक बार हंसकुंड जाते हैं ये देवता

Fri, 01 Mar 2019 03:57 PM IST
ashok chauhan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी Published by: ashok chauhan Updated Fri, 01 Mar 2019 03:57 PM IST
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Chunjwala Mahadev mandi visit Hans Kund Once in 20 years to earn the powers

सराज घाटी के आराध्य देव चुंजवाला महादेव शुक्रवार को शालागाड़ बिजर बुरना हार से अपने लाव लश्कर के साथ मंडी शिवरात्रि महोत्सव के लिए रवाना होंगे। सराज में बड़ा देव विष्णु मतलोड़ा के बाद दूूूसरे स्थान पर देव चुंजवाला को माना जाता है।

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देवता के पुजारी टेक सिंह ने बताया कि 20 वर्ष में एक बार देवता अपने तीर्थ स्थान हंसकुंड में शक्तियां अर्जित करने के लिए जाते हैं। उन्होंने बताया है कि देवता का यह स्थान प्राकृतिक सुंदरता से लबरेज है। आठ वर्ष पहले देवता हंसकुंड गए थे।
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अब 12 वर्ष के बाद हंसकुंड के लिए देवता प्रस्थान करेंगे। देवता को शिवरात्रि का निमंत्रण मिल गया है। देवता के कारदार बुधे राम ने बताया कि इस बार देवता को शालागाड़ हार से शिवरात्रि के लिए ले जाया जाएगा।
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उन्होंने बताया, देवता की सात हारियां हैं और सात हारियों का देवता होने के कारण हर वर्ष अलग-अलग हार के लोग देवता को शिवरात्रि के लिए ले जाते हैं। कहा कि सात हारियों के फैसले के अनुसार शालागाड़ हार पंचायत थाची को शिवरात्रि के तमाम कायदे और नियमों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

नि:संतानों को संतान सुख देते हैं देव चुंजवाला

Chunjwala Mahadev mandi visit Hans Kund Once in 20 years to earn the powers

देवता के गूर सेस राम का कहना है कि जिन माता-पिता के संतान नहीं होती है। उनकी मनोकामना देव चुंजवाला अपने जगराते में आकर पूरी करते हैं। इसका प्रमाण आज भी पूरे सराज घाटी में है। उन्होंने बताया है कि देवता का जगराता हर साल 15 और 16 मई को होता है। इस जगराते में हजारों श्रद्धालु शिरकत करते हैं। 

देवता का इतिहास बताना नियमों के खिलाफ 
देवता के कारदार बुधे राम ने बताया कि देवता का इतिहास बताना नियमों के खिलाफ है। देवता के सख्त आदेश हैं कि किसी को भी इतिहास नहीं बताया जाए। उन्होंने बताया है कि लंबे समय से देवता के आदेशों का पालन कर रहे हैं। इसलिए नियमों का उल्लंघन नहीं कर सकते हैं। 

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