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इस वजह से ढाई साल के मासूम को नहीं मिल पा रहे मम्मी-पापा

Tue, 04 Sep 2018 11:18 AM IST
राकेश भारद्वाज, अमर उजाला, धर्मशाला
राकेश भारद्वाज, अमर उजाला, धर्मशाला Updated Tue, 04 Sep 2018 11:18 AM IST
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child deprived from love of mother and father in dharamshala

पैदा होते ही मां ने मरने के लिए छोड़ दिया...जब भगवान ने जिंदगी बख्श दी तो अनाथ आश्रम का सहारा मिला। मरने के लिए छोड़ने वाली मां फिर लौट आई लेकिन इस बार वह फिर से छोड़ कर चली गई।

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दुनिया के ताने-बाने की समझ से दूर ढाई वर्ष का मासूम मास्टर अंश मझधार में फंसा है। बात वर्ष 2015 की है। पुलिस थाना गगल के तहत वर्ष 2015 में झाड़ियों में एक नवजात शिशु मिला। पैदा होते ही मां इस मासूम को झाड़ियों में फेंक कर गायब हो गई थी।
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शिशु को जिला बाल संरक्षण कमेटी को सौंपा गया जिसे कमेटी ने शिमला स्थित शिशु गृह में भेज दिया। यहां मासूम अनाथ को मास्टर अंश का नाम मिला। लेकिन, जैसे ही शिशु को गोद देने की बात आई तो उसकी मां प्रकट हो गई। उसने अंश को किसी को भी गोद देने से मना कर दिया।

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अंश की मां एक बार भी कोर्ट में पेश नहीं हुई

child deprived from love of mother and father in dharamshala

लेकिन, मां अपने साथ इस बच्चे को नहीं ले गई। अब अंश की मां न ही बच्चे को अपने साथ ले जा रही है और न ही उसकी रजामंदी के बिना उसे किसी को गोद दिया जा सकता है। ऐसे में मामला कोर्ट में है।

लेकिन, इसके बाद अंश की मां एक बार भी कोर्ट में पेश नहीं हुई। इससे अंश की मां की कोर्ट में स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। हालांकि, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड और जिला बाल संरक्षण कमेटी सहित अन्य कई बैठकों में भी अंश का मामला उठ चुका है।

गोद लेने की कतार में हैं आठ दंपती

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लेकिन, मामला कोर्ट में लंबित होने की वजह से कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है।जिला बाल संरक्षण कमेटी के माध्यम से ही बच्चा गोद लेने के लिए अभी भी जिले से आठ दंपती इंतजार में हैं, जबकि इसके अलावा ऑनलाइन आवेदन करने वाले दंपती अलग से हैं।

यदि मास्टर अंश का मामला सुलझ जाता है, तो न केवल बच्चा गोद लेने वालों की कतार में लगे किसी एक दंपती की गोद भर सकती है बल्कि अंश को भी माता-पिता का प्यार मिल सकेगा। 

मास्टर अंश का मामला कोर्ट में लंबित है। कोर्ट के फैसले के बाद ही अंश के मामले में कोई कार्रवाई हो सकती है। - केएस धीमान, जिला बाल संरक्षण अधिकारी 

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