आसान नहीं है पी. मित्रा का मुख्य सूचना आयुक्त बनना
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प्रदेश सरकार के चीफ सेक्रेटरी पी. मित्रा की मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर तैनाती इतनी आसान नहीं है। इसके लिए पहले तीन सदस्यीय समिति की रजामंदी जरूरी है। इस समिति में मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल होंगे। अगर इस तीन सदस्यीय में से एक भी सदस्य राजी नहीं होता है तो पी. मित्रा आयुक्त नहीं बन सकेंगे।
सूत्र बताते हैं कि प्रदेश सरकार की ओर से पी. मित्रा को हरी झंडी मिल सकती है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी पी मित्रा के मुख्य सूचना आयुक्त लगाए जाने पर सहमत होंगे, इस पर संशय बना हुआ है। मुख्य सूचना आयुक्त भीमसेन का कार्यकाल 24 मार्च को पूरा होने जा रहा है।
चीफ सेक्रेटरी पी. मित्रा भी 31 मई, 2016 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। आईएएस लॉबी में चर्चा है कि चीफ सेक्रेटरी पी. मित्रा को सेवानिवृत्त होने से पहले ही मुख्य सूचना आयुक्त लगाया जा सकता है। आईएएस अफसरों के कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक इन दिनों मुख्य सूचना आयुक्त की तैनाती की खूब चर्चा है।
मुख्य सचिव पद के लिए भी जोड़तोड़
मुख्य सचिव पी. मित्रा के सेवानिवृत्त होने के बाद अगला चीफ सेक्रेटरी कौन होगा? इस पर भी सचिवालय में चर्चा का बाजार गर्म है। वरिष्ठता सूची की बात करें तो मुख्य सचिव पी. मित्रा के बाद दूसरे नंबर पर एसीएस दीपक सानन हैं, लेकिन सानन को सरकार ने एक मामले में चार्जशीट किया है। इसलिए वे सीएस पद के प्रबल दावेदार नहीं माने जा रहे हैं। हालांकि, केंद्र से अभियोजन मंजूरी न मिलने से उनका इस चार्जशीट को वापस लेने का आवेदन सरकार के पास विचाराधीन है।
तीसरे नंबर पर आईएएस अजय मित्तल केंद्रीय प्रति नियुक्ति पर जा रहे हैं। इसके बाद वरिष्ठता में आने वाले अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य विनीत चौधरी भी निजी नौकरी पर जाने को सरकार से अवकाश मांग चुके हैं। इनके बाद एसीएस उपमा चौधरी और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के एसीएस वीसी फारका मुख्य सचिव पद की दावेदारी में हैं।