Chester Hills Dispute: बेनामी लेनदेन, वित्तीय अनियमितता प्रमोटर और डेवलपर पर 35-35 लाख का जुर्माना
चेस्टर हिल्स आवासीय परियोजना के दो चरणों— चेस्टर हिल्स-2 और चेस्टर हिल्स-4 के प्रमोटरों पर रेरा द्वारा कुल 70 लाख रुपये का अंतरिम जुर्माना लगाया है। पढ़ें पूरी खबर...
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रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने सोलन के चेस्टर हिल्स-2 और 4 प्रोजेक्ट में बेनामी लेनदेन, वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रमोटर हंसराज ठाकुर और डेवलपर मैसर्स चेस्टर हिल्स पर 35-35 लाख का जुर्माना लगाया है। सोलन के उपायुक्त को जांच कर जल्द रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई 5 जून को होगी। रेरा ने प्रमोटर और डेवलपर के बीच संयुक्त विकास समझौते को रद्द करने से इन्कार कर दिया है। स्पष्ट किया कि डीसी से भू स्वामित्व और धारा 118 के अनुपालन पर अंतिम रिपोर्ट मिलने तक प्रोजेक्ट रिकॉर्ड में बदलाव न करें।
निर्माण में बड़े पैमाने पर खामियों और डेविएशन के लिए आर्किटेक्ट और इंजीनियर पर कार्रवाई के लिए रेरा ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को पत्र लिखा है। गलत वित्तीय रिपोर्ट दाखिल करने के लिए संबंधित सीए पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के कब्जा सौंपने और आवश्यक सेवाओं की कमी पर प्रमोटर से जवाब तलब किया गया है।
नगर निगम सोलन और शहरी, नगर एवं ग्राम योजना के निदेशक से रेरा ने जवाब तलब किया है। नगर निगम को प्रोजेक्ट में पाई गई कमियों पर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। इसके साथ ही निदेशक (शहरी विकास) और निदेशक (नगर एवं ग्राम योजना) को भी मामले की जांच कर अपनी टिप्पणी देने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच में सामने आया कि प्रमोटर ने रेरा एक्ट की धारा 4(2)(1)(डी) का उल्लंघन किया। आवंटियों से प्राप्त राशि का 70% अलग बैंक खाते में जमा करना जरूरी है, जिसका उपयोग निर्माण और भूमि की लागत के लिए हो सकता है। ऑडिट में खुलासा हुआ कि प्रमोटर ने प्रोजेक्ट्स के फंड मिला दिए, जिससे धन के सही उपयोग का सत्यापन करना संभव नहीं। एसडीएम सोलन की रिपोर्ट के आधार पर रेरा ने टिप्पणी की कि ढांचा बेनामी लेनदेन जैसा लगता है। भू मालिक हंसराज को फ्रंट (मुखौटा) के रूप में इस्तेमाल किया, नियंत्रण और व्यावसायिक लाभ गैर-कृषकों के पास था, जिन्होंने धारा 118 में अनुमति नहीं ली। रेरा ने राज्य सरकार और डीसी से स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है।
प्रमोटर को आदेश दिया है कि वह प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति का ब्लॉक-वार विवरण, कॉमन सुविधाओं का स्टेटस और आवंटियों से ली राशि का ब्योरा पेश करे। प्रमोटर को स्पष्ट करना होगा कि जनता से जुटाए पैसे का उपयोग कहां और कैसे किया। यह जानकारी निर्धारित प्रारूप में सीए द्वारा प्रमाणित करवाकर देनी होगी।
मामले में आमने-सामने आ चुके हैं मुख्य सचिव और पूर्व मुख्य सचिव
मामले में मुख्य सचिव (सीएस) संजय गुप्ता और पूर्व सीएस आमने-सामने आ चुके हैं। पूर्व सीएस एवं रेरा के पूर्व अध्यक्ष रहे डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने संजय गुप्ता पर आरोप लगाए थे कि उन्होंने सोलन के डीसी को एसडीएम की रिपोर्ट पर कार्रवाई न करने के आदेश पारित किए। प्रोजेक्ट में अनधिकृत निर्माण गिराने के नगर निगम के आदेश रद्द करने के भी अवैध आदेश दिए थे। इस पर हाईकोर्ट ने 7 अप्रैल को मुख्य सचिव के इस आदेश पर रोक लगा दी थी।
वहीं, चेस्टर हिल जमीन खरीद पर सीएस गुप्ता ने कहा था कि यह जमीन सीएस के रूप में नियुक्ति से पहले ही उन्होंने खरीदी थी। गुप्ता ने कहा था कि दो पूर्व मुख्य सचिव आरडी धीमान और प्रबोध सक्सेना उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। वहीं, पूर्व सीएस विनीत चौधरी भी हरियाणा में भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे आईएएस अधिकारियों पर हुई त्वरित कार्रवाई का हवाला देते हुए हिमाचल सरकार के रवैये पर सवाल उठा चुके हैं। उधर, रेरा के अध्यक्ष धीमान ने सीएस गुप्ता द्वारा उन पर लगाए आरोपों को निराधार बताया था। उन्होंने कहा था कि मामले में जो भी आदेश पारित किए गए हैं, वे पूरी तरह से उपलब्ध तथ्यों पर आधारित हैं।