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एचआटीसी की बस में सफर कर रहे हैं तो जरा पढ़ लें

Wed, 04 Feb 2015 02:36 PM IST
Updated Wed, 04 Feb 2015 02:36 PM IST
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chances of brake failure in new hrtc buses

हिमाचल परिवहन निगम के बेड़े में हाल ही में जेएनयूआरएम के तहत शामिल हुईं 65 नई बसों पर सवाल उठना शुरू हो गए हैं। बीते दिनों तीन नई बसों के ब्रेक फेल होने की बात सामने आई हैं। दूसरा ये बसें सामान्य बसों से ज्यादा डीजल पी रही हैं। इससे नई बसें निगम के लिए तो घाटे का सौदा साबित हो रही हैं, उलटा हादसों का खतरा मंडरा रहा है।

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सूत्रों के अनुसार लंबी बसें होने के चलते निगम चालक भी इन्हें पहाड़ी क्षेत्रों में चलाने से कतरा रहे हैं। चालकों को कंप्यूटराइज्ड बसों का अभी सही ढंग से प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। फील्ड से मिली जानकारी के अनुसार नई बसें ढाई से तीन किलोमीटर प्रति लीटर एवरेज दे रही हैं जबकि सामान्य बसें एक लीटर में 5 से छह किमी की दूरी तय करती हैं।
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नालागढ़, सोलन और मंडी में तीन बसों के ब्रेक फेल हुए हैं। इसका कारण कम डीजल होना बताया जा रहा है। इसको देखते हुए निगम कार्यालय ने डीएम को आदेश दिए हैं कि इन बसों में कम से कम 80 लीटर डीजल होना चाहिए, ताकि ब्रेक फेल न हो। इन बसों की डीजल टंकी 165 लीटर की है।

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12 मीटर लंबी, 900 एमएम ऊंची हैं बसें

chances of brake failure in new hrtc buses

ये बसें 12 मीटर लंबी और 900 एमएम ऊंची हैं। ऊपरी शिमला की सड़कें तंग हैं। ऐसे में इन रूटों पर नई बसों को चलाना खतरनाक हो सकता है। मोड़ पर सड़क की चौड़ाई कम है। मोड़ काटते वक्त चालकों को परेशानी हो रही है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए 9 मीटर लंबी और 650 एमएम ऊंची बसें उपयुक्त माना जाती हैं।

परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि बड़ी बसों को मैदानी इलाकों के शहरों में चलाया जाएगा। अपर शिमला के लिए छोटी बसें लाई जा रही हैं। चालकों को नई बसों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बसें कंप्यूटरीकृत हैं, चालकों को कंपनी की ओर से प्रशिक्षण दिया जाना है। दूसरी बसों की अपेक्षा इन बसों से निगम को काफी कमाई हो रही है। बसों की ब्रेक फेल होने के कारण डीजल कम होना नहीं है।

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